छतरपुर, संजय अवस्थी । जिला औषधि विक्रेता संघ (सम्बद्ध: मध्य प्रदेश कैमिस्ट एण्ड ड्रगिस्ट एसोसिएशन) के आह्वान पर आज २० मई २०२६ को छतरपुर जिले के समस्त केमिस्ट एवं दवा विक्रेताओं ने अपनी दुकानें पूर्णतः बंद रखकर एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। इस देशव्यापी आंदोलन का समर्थन ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) और राज्य संगठन द्वारा किया गया। हड़ताल के बाद व्यापारियों ने स्थानीय प्रशासन (जिलाधीश) के माध्यम से देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के नाम एक गंभीर ध्यानाकर्षण ज्ञापन सौंपा।

जनस्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ का आरोप

जिला औषधि विक्रेता संघ के अध्यक्ष अशोक पटैरिया, सचिव कैलाश साहू और कोषाध्यक्ष सनत गुरुदेव द्वारा हस्ताक्षरित इस ज्ञापन में ऑनलाइन दवा कंपनियों की मनमानी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है। दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से हो रही दवाओं की अवैध बिक्री, बिना वैध व सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की होम डिलीवरी और बिना किसी स्पष्ट वैधानिक प्रावधान के घर-घर दवा वितरण जैसी गतिविधियां करोड़ों मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन चुकी हैं।

केमिस्ट एसोसिएशन ने साफ तौर पर कहा कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट १९४० एवं नियम १९४५ में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद ई-कॉमर्स कंपनियां धड़ल्ले से व्यापार कर रही हैं। वर्ष २०१८ में केवल जनमत आमंत्रित करने के लिए जारी की गई अधिसूचना GSR 817(E) अब पूरी तरह अप्रासंगिक और निरर्थक हो चुकी है।

कोविड काल के नियमों का हो रहा दुरुपयोग

दवा विक्रेताओं ने ध्यानाकर्षण कराते हुए बताया कि कोविड महामारी जैसी असाधारण परिस्थिति में आपातकालीन समय के लिए 'GSR 220(E)' जारी किया गया था, जिसकी वर्तमान सामान्य परिस्थितियों में कोई आवश्यकता नहीं है। परंतु, विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म एवं क्विक कॉमर्स कंपनियों द्वारा इसका दुरुपयोग कर अनियंत्रित तरीके से दवाओं की होम डिलीवरी की जा रही है। इन अवैध गतिविधियों के खिलाफ कई बार साक्ष्यों सहित केंद्र सरकार एवं संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष आवाज उठाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस व प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।

जिला औषधि विक्रेता संघ की प्रमुख माँगें:

कठोर कार्रवाई: अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री के विरुद्ध सरकार तत्काल और कठोर कानूनी कार्रवाई करे।

पूर्ण प्रतिबंध: बिना वैध एवं सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की बिक्री और होम डिलीवरी को पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाए।

अधिसूचनाएं वापस लें: आपातकाल में लागू की गई अधिसूचना GSR 817(E) एवं GSR 220(E) को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

बाजार नीति पर रोक: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा अपनाई जा रही अत्यधिक छूट (Deep Discounting) एवं गलाकाट प्रतियोगिता (Predatory Pricing) की नीति पर तुरंत रोक लगाई जाए, जिससे छोटे व्यापारियों का अस्तित्व बच सके।

छोटे व्यापारियों के अस्तित्व पर संकट

ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि ऑनलाइन कंपनियों की इन अनियंत्रित गतिविधियों को तुरंत नहीं रोका गया, तो देश के लाखों लाइसेंसधारी छोटे केमिस्ट और दवा व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का अभूतपूर्व संकट खड़ा हो जाएगा। पदाधिकारियों ने याद दिलाया कि कोविड महामारी जैसे अत्यंत कठिन समय में भी देश के दवा व्यापारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर पूरे देश में निर्बाध दवा आपूर्ति सुनिश्चित कर स्वास्थ्य तंत्र की मजबूत रीढ़ की भूमिका निभाई थी।

दवा विक्रेताओं ने देश के जनहित, जनस्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा के व्यापक हित में प्रधानमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक एवं सख्त कार्रवाई करने की विनम्र अपील की है।