भोपाल। मध्य प्रदेश की कई बड़ी कंपनियां देश के ‘विलफुल डिफॉल्टर’ यानी इरादतन कर्ज न चुकाने वालों की टॉप-10 सूची में शामिल हैं। संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 27 फरवरी 2026 तक प्रदेश से जुड़ी प्रमुख कंपनियों पर ही करीब ₹8,349 करोड़ का बकाया है। इंदौर, खरगोन और धार से संचालित कंपनियों ने बैंकों से भारी कर्ज लेने के बाद भुगतान नहीं किया, जिससे बैंकिंग सिस्टम पर बड़ा असर पड़ा है।
इस सूची में सबसे प्रमुख नाम बीटा नेफ्थोल का है, जिसका मुख्यालय इंदौर में और फैक्ट्री खरगोन के बड़वाह में थी। यह कंपनी 2014 से लगातार टॉप डिफॉल्टर में शामिल रही है और वर्तमान में परिसमापन की प्रक्रिया में है। वहीं धार जिले के पीथमपुर स्थित गिल्ट पैक लिमिटेड पर भी 3 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज बकाया है और सेबी ने इसके निदेशकों को पूंजी बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है।
टेक्सटाइल सेक्टर की बड़ी कंपनी एस कुमार्स नेशनवाइड (SKNL), जिसकी इकाइयां देवास और खंडवा में थीं, भी भारी कर्ज न चुका पाने के कारण डिफॉल्टर बनी। इसके अलावा इंदौर से शुरू हुई रूचि सोया कंपनी भी दिवालिया प्रक्रिया में गई, जिसे बाद में पतंजलि समूह ने अधिग्रहित किया।
सबसे पुराने और बड़े डिफॉल्टरों में जूम डेवलपर्स का नाम सामने आता है, जिसका पंजीकृत कार्यालय इंदौर में है। यह कंपनी 2014 से 2016 तक देश की टॉप डिफॉल्टर सूची में पहले स्थान पर रही। ईडी, सीबीआई और इंटरपोल सहित कई एजेंसियों ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की है और प्रमोटरों पर मनी लॉन्ड्रिंग व धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं।
बैंकों ने इन कंपनियों की संपत्तियां कुर्क करने, नीलामी और कानूनी कार्रवाई के जरिए वसूली की प्रक्रिया शुरू की है। बावजूद इसके हजारों करोड़ रुपए की वसूली अब भी अटकी हुई है, जिससे यह मामला प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है।

