नई दिल्ली, 8 मई । नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने शुक्रवार को एक व्यापक एनडीएमसी मानसून कार्य योजना-2026 का अनावरण किया। इस योजना का उद्देश्य बारिश के दौरान सुचारू नागरिक सेवाएं सुनिश्चित करना और जलभराव को कम करना है।

चहल ने बताया कि कार्य योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "स्मार्ट, स्वच्छ और प्रौद्योगिकी-आधारित शहरी शासन" के दृष्टिकोण के अनुरूप तैयार की गई है, ताकि नागरिकों को बेहतर, सुरक्षित और आधुनिक नागरिक सुविधाएं प्रदान की जा सकें।

उन्होंने बताया कि कार्य योजना में मानसून से पहले की तैयारियां, बारिश के दौरान आपातकालीन व्यवस्थाएं और मानसून के बाद क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत शामिल है। एनडीएमसी ने 31 मार्च तक पहले चरण का 100 प्रतिशत गाद निकालने का काम पूरा कर लिया है, जबकि दूसरा चरण 15 जून तक पूरा हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि एनडीएमसी ने जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी और योजना में सुधार के लिए बेलमाउथ, गली ट्रैप, कनेक्टिंग पाइप, मैनहोल और ईंट के बैरल ड्रेन सहित भूमिगत जल निकासी नेटवर्क की जीआईएस मैपिंग शुरू कर दी है।

नालियों, तूफानी जल निकासी चैनलों, बेलमाउथ और गली ट्रैप की व्यापक सफाई और गाद निकालने का काम चल रहा है। क्षतिग्रस्त सड़कों, गड्ढों, खाइयों, मैनहोल कवर और जल निकासी व्यवस्था की मरम्मत भी जारी है। मानसून से पहले सड़कों, पुलों, वर्षा जल संचयन गड्ढों और विद्युत प्रणालियों का निरीक्षण किया जा रहा है।

कुलजीत सिंह चहल ने जानकारी दी कि जलभराव की आशंका वाले स्थानों पर जल निकासी पंप, डीजी सेट, कर्मचारी और नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था कर दी गई है। वर्तमान में एनडीएमसी क्षेत्र में पुराना किला, दयाल सिंह कॉलेज क्षेत्र, पंचकुइयां रोड, हनुमान मंदिर और सत्य सदन प्रमुख जलभराव वाले स्थान बचे हैं। भारी बारिश के दौरान त्वरित कार्रवाई के लिए इन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे और सेंसर आधारित निगरानी प्रणाली लगाई जा रही है।

चहल ने कहा कि एनडीएमसी ने पहली बार ताज मानसिंह के पास क्यू पॉइंट पर भूमिगत नालियों और ढकी हुई नालियों का रोबोटिक निरीक्षण शुरू किया है।

सर्वेक्षण का लगभग 85 प्रतिशत कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। यह तकनीक गाद जमाव, अवरोधों, क्षतिग्रस्त हिस्सों और जल संचय स्थलों की पहचान करने में सहायक है। 35 लाख रुपए की लागत से सुपर सकर मशीनों के माध्यम से गाद हटाने का काम किया जा रहा है।

चहल ने बताया कि अगले वर्ष, क्यू पॉइंट, डीटीसी डिपो और दयाल सिंह कॉलेज क्षेत्रों सहित लगभग 3200 वर्ग मीटर क्षेत्र में रोबोटिक तकनीक का उपयोग करके 43 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से गाद हटाने का काम किया जाएगा। सरोजिनी नगर के पास नाले का तल ईंटों से बने नाले से ऊंचा पाया गया, जिसके कारण जल जमाव हो रहा है।

इस समस्या के समाधान के लिए एनडीएमसी ने पहले ही दो स्थायी उच्च क्षमता वाले पंप स्थापित कर दिए हैं और आवश्यकतानुसार 15 जून तक दो अतिरिक्त पंप स्थापित किए जाएंगे।

चहल ने बताया कि एनडीएमसी मानसून सुरक्षा, जलजनित रोगों की रोकथाम, अपशिष्ट के उचित निपटान और नालियों में मलबा न डालने के संबंध में जागरूकता अभियान भी चला रही है।

उन्होंने कहा कि तूफानों और भारी बारिश के दौरान दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पेड़ों की छंटाई और कमजोर शाखाओं को हटाया जा रहा है।