जबलपुर,अनुराग शुक्ला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शनिवार 25 अप्रैल 2026 को शाम 5:30 बजे संस्कृतिक थिएटर, कल्चरल स्ट्रीट भंवरताल में एक प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शहर के स्कूल एवं कोचिंग संचालक, शिक्षक वर्ग और मीडिया से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तियों की उपस्थिति रही। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद स्थापित करना और संगठन के कार्यों को लेकर फैली जिज्ञासाओं को स्पष्ट करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय विद्यालय GCF-1 के प्राध्यापक श्री रजनीश कुमार सिंघाई रहे, जिन्होंने अपने संबोधन में बच्चों के मन में राष्ट्रप्रेम जागृत करने की आवश्यकता पर बल दिया और शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। वहीं महाकौशल प्रांत के प्रांत संघचालक डॉ. प्रदीप दुबे का सानिध्य कार्यक्रम को प्राप्त हुआ, जिससे आयोजन को विशेष दिशा मिली।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. संजय पाठक ने अपने बौद्धिक उद्बोधन में संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित हिंदू सम्मेलन एवं जन गोष्ठियों के उद्देश्य को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि समाज में संघ को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां और जिज्ञासाएं हैं, जिन्हें दूर करने के लिए इस प्रकार के संवाद कार्यक्रम आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी बताया कि संघ की शुरुआत एक शाखा से हुई थी और आज यह देशभर में प्रतिदिन 60 हजार से अधिक शाखाओं तक विस्तारित हो चुका है, जिसका मूल उद्देश्य समाज को संगठित करना है।
अपने वक्तव्य में उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के विचारों को समझने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि देश की पराजय का मुख्य कारण समाज का असंगठित होना रहा है और इसी सोच के साथ संघ की स्थापना की गई थी। उन्होंने संघ की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संगठन हिंदू समाज को संगठित करने का कार्य करता है और हिंदू धर्म को एक जीवन पद्धति के रूप में प्रस्तुत करता है, जो समाज केंद्रित है।
इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने संघ के दूसरे सरसंघचालक एम. एस. गोलवलकर और सरदार वल्लभभाई पटेल के बीच हुई मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों ने देश की हर विपदा में सेवा कार्यों के माध्यम से अपनी भूमिका निभाई है और संघ का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रकार्य से जोड़ना है, जिससे समाज में एकता और संगठन मजबूत हो सके।
कार्यक्रम के समापन में एक प्रेरक कथा के माध्यम से सामाजिक चेतना का संदेश दिया गया, जिसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ। इस दौरान युवाओं को संगठन से जोड़ने, शिक्षा पद्धति में सुधार और पाठ्यक्रम विकास जैसे विषयों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर शोध कार्य किए जा रहे हैं और स्थानीय भाषाओं में साहित्य विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

