छतरपुर विनोद मिश्रा। जेल की ऊँची चारदीवारी, जहाँ लोहे की सलाखों के पीछे सिर्फ सज़ा और सख्त कानून का पहरा होता है, वहीं से प्यार और इंसानियत की एक ऐसी कोमल दास्तां निकलकर सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को हैरान कर दिया है। केंद्रीय जेल सतना में पदस्थ सहायक जेल अधीक्षक फिरोजा खातून और पूर्व कैदी धर्मेंद्र सिंह की शादी इन दिनों छतरपुर जिले के लवकुशनगर में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह केवल दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि धर्म और सामाजिक बेड़ियों को तोड़कर लिखी गई 'गंगा-जमुनी तहजीब' की एक नई इबारत है, जिसमें एक अधिकारी ने साबित कर दिया कि मोहब्बत और इंसानियत का कोई मजहब नहीं होता।


सलाखों के पीछे शुरू हुआ था मुलाकातों का सिलसिला

इस अनोखी कहानी की शुरुआत जेल के भीतर ड्यूटी के दौरान हुई थी। रीवा की रहने वाली फिरोजा खातून जब सतना जेल में वारंट इंचार्ज के पद पर तैनात थीं, तब चंदला निवासी धर्मेंद्र सिंह वहां एक हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था। धर्मेंद्र जेल के भीतर वारंट सेक्शन में काम देखता था, इसी वजह से दोनों के बीच आधिकारिक मुलाकातों का सिलसिला शुरू हुआ। पहले यह जान-पहचान दोस्ती में बदली और फिर धीरे-धीरे यह रिश्ता गहरी मोहब्बत में तब्दील हो गया। फिरोजा ने धर्मेंद्र के भीतर छिपे एक पश्चाताप करने वाले इंसान को देखा, तो धर्मेंद्र ने अपनी 'अफसर' के मानवीय रूप को अपना दिल दे दिया।


14 साल की सजा और एक नया सफर

धर्मेंद्र सिंह का अतीत काफी सुर्खियों में रहा था। साल 2007 में चंदला नगर परिषद के उपाध्यक्ष कृष्ण दत्त दीक्षित की हत्या के चर्चित मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा हुई थी। करीब 14 साल जेल की सलाखों के पीछे गुजारने के बाद, उसके अच्छे आचरण और व्यवहार को देखते हुए जेल प्रबंधन ने उसे रिहा कर दिया था। पिछले 4 सालों से धर्मेंद्र जेल से बाहर था, लेकिन फिरोजा के साथ उसका रिश्ता और भी मजबूत होता गया। दोनों ने फैसला किया कि वे समाज की परवाह किए बिना साथ रहेंगे, हालांकि इस फैसले की राह आसान नहीं थी क्योंकि फिरोजा के परिजन इस विवाह के सख्त खिलाफ थे।


बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने किया 'बेटी' का कन्यादान

जब फिरोजा के परिवार ने इस शादी से दूरी बना ली, तो लवकुशनगर के एक मैरिज हाउस में आयोजित इस विवाह समारोह में एक और भावुक कर देने वाला मोड़ आया। फिरोजा की इच्छा का सम्मान करते हुए और समाज में भाईचारे का संदेश देने के लिए बजरंग दल के कार्यकर्ता आगे आए। हिंदू रीति-रिवाज और पूरी तरह से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि के फेरे लेकर दोनों परिणय सूत्र में बंध गए। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने न केवल इस शादी का समर्थन किया, बल्कि खुद आगे बढ़कर फिरोजा का कन्यादान भी किया। यह दृश्य देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं।


इंसानियत की नई मिसाल बनी यह शादी

आज यह शादी न केवल लवकुशनगर बल्कि केंद्रीय जेल सतना में भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जेल के कैदियों से लेकर बड़े अधिकारियों तक, हर कोई इस जोड़े को बधाई दे रहा है। लोगों का मानना है कि फिरोजा ने जितनी ईमानदारी अपनी ड्यूटी निभाने में दिखाई, उतनी ही हिम्मत उन्होंने अपने प्यार को मुकाम तक पहुँचाने में दिखाई है। एक पूर्व कैदी और एक जेल अधिकारी की यह जोड़ी समाज के उन लोगों को आईना दिखा रही है जो मजहब और अतीत के नाम पर दीवारें खड़ी करते हैं। यह कहानी सिखाती है कि सजा खत्म हो सकती है, लेकिन इंसानियत और प्रेम का सफर हमेशा जारी रहता है।