छतरपुर, अंकुर यादव। सागर जिले के बण्डा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुईं 32 मौतों के मामले के तार जैसे-जैसे सुलझ रहे हैं वैसे-वैसे इस पूरे मामले के असली गुनहगार भी बेनकाब होते जा रहे हैं। पुलिस ने 20 से ज्यादा लोगों पर मुकदमे दर्ज कर लगभग आधा दर्जन गुनहगारों के अवैध मकानों को जमींदोज करना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के दौरे के बाद पुलिस और प्रशासन का एक्शन दिन-प्रतिदिन सख्त होता जा रहा है लेकिन अब भी एक शख्स है जिसकी तलाश पुलिस की कई टीमें कर रही हैं और यह कोई मामूली इंसान नहीं बल्कि जहरीली शराब का फार्मूला बांटने वाला सबसे बड़ा गुनहगार रवि लखेरा है।
रवि लखेरा मप्र के छतरपुर जिले का रहने वाला है। 45 वर्षीय रवि लखेरा ने लगभग 30 साल पहले अपनी नाबालिग अवस्था में ही अवैध शराब के इस काले कारोबार में कदम रख लिया था। जिला मुख्यालय से सटे ग्राम महेबा के सुरेश लखेरे के तीन बेटों में से एक रवि लखेरा बचपन में अपने पिता के परंपरागत कारोबार में हाथ बंटाता था। पिता महिलाओं के साज-श्रंगार से जुड़े छोटे-मोटे व्यापार के जरिये अपनी रोजी-रोटी चलाते थे और पिता के साथ ही महिलाओं की नाजुक कलाईयों में रवि लखेरा भी चूडिय़ां पहनाता था। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी, पिता पर तीन बेटों सहित एक बड़े परिवार का जिम्मा था इसलिए पैसों की चाहत ने रवि लखेरा को गुनाह की दुनिया में दाखिल कर दिया। जल्द से जल्द बहुत पैसा कमाने की चाहत के साथ रवि बचपन में ही अपने गांव में अवैध शराब बेचने लगा। ठेकेदार के संरक्षण में उसने गांव में ही लोगों को अवैध रूप से शराब बेचने का काम शुरू किया और यहीं से उसे पैसा कमाने की लत लग गई। देखते ही देखते वह महेबा सहित आसपास के कई गांव में ठेकेदार की शराब को ब्लैक के जरिये खपाने लगा। लगभग 10 साल पहले रवि लखेरा के महेबा स्थित एक खेत से एक ट्रक अवैध शराब पकड़ी गई थी। जैसे-जैसे रवि की उम्र बढ़ती गई उसके गुनाहों की सूची भी लंबी होती गई। लगभग 20 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए फिर भी रवि लखेरा ने शराब के कारोबार को नहीं छोड़ा। अवैध शराब से शुरू हुआ उसका कारोबार धीरे-धीरे शराब के वैध कारोबार की तरफ बढऩे लगा, उसने शराब के अन्य माफियाओं और कुछ भाजपा नेताओं के साथ मिलकर शराब के ठेके लेना शुरू कर दिया। वर्तमान में भी छतरपुर के गढ़ीमलहरा में स्थित शासकीय शराब ठेके और निवाड़ी के एक सरकारी ठेके में उसकी हिस्सेदारी है। वक्त के साथ उसने शराब के वैधानिक धंधे को शुरू तो किया लेकिन असली माल अवैध धंधे से ही आता था इसलिए इस कारोबार को नहीं छोड़ा। जब छतरपुर में वह अवैध शराब कारोबारी के रूप में कुख्यात हो गया और पुलिस उसे अनेक मुकदमों में आरोपी बनाने लगी तो पुलिस की वसूली से तंग आकर उसने छतरपुर जिला ही छोड़ दिया। खबर है कि वह कुछ वर्षों पहले मप्र छोड़कर राज्य की सीमा से सटे ललितपुर में रहने लगा। अपनी पत्नि शिवानी और बच्चों के साथ उसने यहां एक नई दुनिया तो बसायी लेकिन अपने कारोबार को और गंदा बनाना शुरू कर दिया। शराब कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि ललितपुर में ही उसने शराब की एक फैक्ट्री शुरू की जहां वह कैमिकल के जरिये अपने खुद के शराब ब्राण्ड बनाने लगा। लगभग 4 महीने पहले पुलिस ने इसी फैक्ट्री से अवैध शराब से जुड़ी सामग्री भी पकड़ी थी। रवि इस मामले में जेल गया और हाल ही में 15 अगस्त को उसकी जमानत हुई थी। बण्डा कांड में पकड़े गए दो आरोपी चंदू लोधी और मनीष लोधी ने पुलिस को दिए बयानों में बताया कि नकली शराब बनाने का फॉर्मूला उन्होंने रवि लखेरा से ही लिया था। इसी नकली शराब के फॉमूले ने अब तक कई लोगों की जान ले ली है। रवि लखेरा फिलहाल फरार है और उस पर पुलिस ने इनाम घोषित कर रखा है। पुलिस सागर, निवाड़ी और छतरपुर के कई ठिकानों पर दबिश देकर उसे तलाश रही है लेकिन वह अब तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है।
पांच करोड़ की हवेली, ऑडी गाड़ी और महंगे फोन का शौकीन
बताया गया है कि रवि लखेरा जो बचपन में दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज था अब वह ललितपुर में 5 करोड़ रूपए से ज्यादा महंगी हवेली में रहता है। शराब की फैक्ट्री के साथ-साथ ललितपुर, सागर और छतरपुर में उसके कई मकान, प्लॉट और जमीनें पड़ी हैं। रवि लखेरा ऑडी जैसी महंगी गाड़ी में चलता है और लाखों रूपए कीमत के फोन चलाता है। पुलिस उसकी अवैध संपत्ति की भी जांच कर सकती है।












