नई दिल्ली, 7 मई । गर्मी में लगातार बढ़ता तापमान न केवल जनजीवन को प्रभावित करता है, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी कई चुनौतियां पैदा करता है। ऐसे समय में शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी है। साथ ही प्राणायाम का अभ्यास भी काफी लाभदायक साबित हो सकता है। विशेष रूप से शीतली प्राणायाम शरीर को ठंडक प्रदान करता है।

शीतली प्राणायम एक आसान योगिक श्वास तकनीक है, जो शरीर को ठंडक प्रदान करता है। इसमें अभ्यासकर्ता अपनी जीभ को मोड़कर (या होंठों को गोल करके) मुंह से सांस अंदर लेते हैं। ऐसा करने से ठंडी हवा शरीर में जाती है, जिससे शरीर की गर्मी कम होती है और मन शांत होता है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने शीतली प्राणायम के लाभ के बारे में बताया है। उनके अनुसार, यह शरीर और मन को ठंडक प्रदान करने वाली एक प्रभावी योगिक तकनीक है। मुख्य रूप से यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करने, उच्च रक्तचाप, तनाव को कम करने और पित्त विकारों को दूर करने में सहायक है। इसे जीभ को मोड़कर नली की तरह बनाकर मुंह से सांस लेने की प्रक्रिया द्वारा किया जाता है।

पित्त दोष को शांत करता है और पैरा सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय कर शरीर को रिलैक्स करने में मदद करता है, जिससे शरीर की अतिरिक्त गर्मी बाहर निकलती है।

इसे करना बेहद आसान है। शीतली प्राणायाम करने के लिए सुबह खाली पेट शांत जगह पर सुखासन या पद्मासन में बैठें। जीभ को निकालकर नलिका की तरह मोड़ें। इसके बाद मुंह से धीरे-धीरे ठंडी हवा अंदर की खींचें। इसके बाद सांस को कुछ सेकंड रोकें और फिर नाक से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। इसे 5 से 10 बार दोहराना चाहिए।

यह प्राणायाम खासकर गर्मी के मौसम में या जब शरीर ज्यादा गरम हो जाए, तब बहुत फायदेमंद होता है। यह तनाव और चिंता को कम करने में भी मदद करता है। इसे केवल गर्म मौसम में ही करने की सलाह दी जाती है। सर्दी, खांसी, अस्थमा या कम रक्तचाप की समस्या होने पर इसे न करें।