Friday, March 6, 2026

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मध्य प्रदेशभोपालप्रदेश के अन्नदाताओं को सरकार का 'तोहफा': गेहूं और उड़द पर भारी बोनस, अंधेरे में सिंचाई से मिलेगी मुक्ति

प्रदेश के अन्नदाताओं को सरकार का 'तोहफा': गेहूं और उड़द पर भारी बोनस, अंधेरे में सिंचाई से मिलेगी मुक्ति

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PeptechTime
6 मार्च 2026, 12:49 pm IST
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भोपाल। मध्यप्रदेश की सरकार ने प्रदेश के अन्नदाताओं की झोली खुशियों से भर दी है। चुनावी वादों को हकीकत में बदलते हुए सरकार ने एक साथ कई बड़े फैसले लिए हैं, जिनका सीधा फायदा खेतों में पसीना बहाने वाले किसानों को मिलेगा। सरकार का यह कदम न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा, बल्कि उनके खेती करने के तरीके और सुरक्षा को भी नई दिशा देगा।


गेहूं और उड़द पर बोनस की बौछार

सरकार ने इस साल गेहूं की खरीदी पर ₹40 प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस देने का बड़ा फैसला किया है। इससे किसानों को उनकी मेहनत का और भी बेहतर दाम मिल सकेगा। इसके साथ ही, पंजीयन से वंचित रह गए किसानों को राहत देते हुए गेहूं पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च से बढ़ाकर अब 10 मार्च कर दी गई है। सिर्फ गेहूं ही नहीं, बल्कि दलहन की खेती करने वाले किसानों के लिए भी खुशखबरी है; उड़द की खरीदी पर सरकार ने ₹600 प्रति क्विंटल के भारी-भरकम बोनस की घोषणा की है। यह बोनस किसानों को अगली फसल की तैयारी और लागत निकालने में बड़ी मदद करेगा।




अब 'दिन के उजाले' में होगी सिंचाई

किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक और ऐतिहासिक और संवेदनशील निर्णय लिया है। अब खेतों में सिंचाई के लिए रात के बजाय दिन में बिजली प्रदान की जाएगी। यह फैसला उन हजारों किसानों के लिए वरदान साबित होगा जो कड़ाके की ठंड, सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों और जंगली जानवरों के डर के साए में रातभर खेतों की रखवाली और सिंचाई करते थे। अब किसान दिन के उजाले में चैन से अपना काम कर सकेंगे, जिससे न केवल हादसों में कमी आएगी बल्कि उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ेगी।


किसानों के हित में 'मास्टरस्ट्रोक'

सरकार के इन फैसलों को कृषि क्षेत्र में एक 'मास्टरस्ट्रोक' माना जा रहा है। बोनस के जरिए जहां किसानों की जेब में सीधा पैसा पहुंचेगा, वहीं दिन में बिजली देने के फैसले से उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा। कृषि जानकारों का कहना है कि पंजीयन की तारीख बढ़ने से उन किसानों को बड़ी राहत मिली है जो तकनीकी कारणों या जानकारी के अभाव में अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए थे। कुल मिलाकर, प्रदेश सरकार ने यह साफ कर दिया है कि उसकी नीतियों के केंद्र में 'अन्नदाता' ही है।

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