उज्जैन। धर्म और अध्यात्म की नगरी उज्जैन ने गुड़ी पड़वा के पावन पर्व पर एक नया इतिहास रच दिया। विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत आयोजित भव्य ड्रोन शो ने क्षिप्रा के तट से लेकर आकाश की ऊंचाइयों तक श्रद्धा और आधुनिक तकनीक का ऐसा मेल प्रस्तुत किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।

करीब 1500 ड्रोनों ने एक साथ आसमान में अपनी रोशनी से भगवान महाकाल, सम्राट विक्रमादित्य और आगामी सिंहस्थ 2028 की स्मृतियों को जीवंत कर दिया। इस अविस्मरणीय नजारे को देखकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भावुक होते हुए कहा कि आज ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे देवता स्वयं इस शोभा को देखने के लिए आकाश मार्ग से हमारे बीच साक्षात पधारे हैं।


मुख्यमंत्री का संबोधन: 'संवत्सर का अभिनंदन और तकनीक का चमत्कार'

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, "आज विक्रम संवत 2083 (रौद्र नाम संवत्सर) का आगमन हो रहा है। कितना अद्भुत समय चल रहा है कि आसमान से 82 जा रहा है और 83 आ रहा है। मेरे भाषण का बहुत कुछ काम तो इन ड्रोनों ने ही पूरा कर दिया है। ये दुनिया के अंदर कैसा अलौकिक दृश्य है कि हमारे ड्रोन के माध्यम से देवी-देवता दृश्य रूप में हमारे सामने आ रहे हैं। इस अद्भुत नजारे का जोरदार अभिनंदन करें।"


आसमान बना कैनवास: 'जय श्री महाकाल' से शुरू हुई गाथा

कॉन्सेप्ट कम्युनिकेशन द्वारा प्रस्तुत इस ड्रोन शो की शुरुआत आसमान में गूंजते "जय श्री महाकाल" के उद्घोष और उससे बनी आकृति के साथ हुई। इसके बाद एक-एक कर आकाश में कई अलौकिक दृश्य साकार हुए:

आध्यात्मिक वैभव: भगवान शिव का त्रिशूल, डमरू, 12 ज्योतिर्लिंग और 84 कल्पों के महादेव की आकृतियां।

भव्य मंदिर: 3D तकनीक से निर्मित महाकालेश्वर मंदिर और शिव-शक्ति का दिव्य मिलन।

सांस्कृतिक विरासत: सांदीपनि आश्रम में श्रीकृष्ण की शिक्षा और न्यायप्रिय सम्राट विक्रमादित्य की शौर्य गाथा।

भविष्य की झलक: विक्रमोत्सव 2026 के लोगो के साथ ही आगामी सिंहस्थ 2028 का गौरवमयी प्रदर्शन।


सिंहस्थ 2028 की आहट और वैश्विक पहचान

इस आयोजन ने न केवल उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती दी, बल्कि 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों का शंखनाद भी कर दिया। हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने जब आसमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के डिजिटल पोर्ट्रेट देखे, तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ड्रोन शो मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रतीक है, जिसने परंपरा को आधुनिकता के साथ जोड़कर नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराया है।