नई दिल्ली। नई दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया पुलिस स्टेशन ने 'ऑपरेशन प्री-साइहॉक' के तहत साइबर धोखाधड़ी का एक मामला सुलझा लिया है। इस मामले में 99,000 रुपए का अनधिकृत ट्रांसफर हुआ था और पुलिस ने बहुत कम समय में राजस्थान के झुंझुनूं से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
ओखला फेज-1 के रहने वाले अनूप हलधर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्हें अपने मोबाइल फोन पर एक अनजान लिंक मिला था। उस लिंक पर क्लिक करते ही उनका डिवाइस हैक हो गया, जिसके बाद उनके कोटक महिंद्रा बैंक खाते से 99,000 रुपए निकाल लिए गए। तुरंत सतर्कता दिखाते हुए उन्होंने घटना की सूचना नेशनल साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन 1930 पर दी।
जांच के दौरान पुलिस ने डिजिटल मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड) का बारीकी से पता लगाया और राजस्थान के झुंझुनूं में उस खाते की पहचान की, जिसमें पैसे ट्रांसफर हुए थे। इकट्ठा किए गए सबूतों के आधार पर ओखला इंडस्ट्रियल एरिया पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई और जांच का जिम्मा सब इंस्पेक्टर संजय मीणा को सौंपा गया।
संजय मीणा, हेड कांस्टेबल धर्मपाल और कॉन्स्टेबल जय राम की टीम तुरंत राजस्थान गई और उस व्यक्ति रजत को पकड़ा, जिसके खाते में पैसे आए थे। पूछताछ से पता चला कि यह खाता मितेश और मनोज कुमार की मदद से खुलवाया और चलाया गया था। उन्होंने धोखाधड़ी से हासिल पैसे को इधर-उधर भेजने के लिए इसे 'म्यूल अकाउंट' (धोखाधड़ी के पैसे के लेन-देन के लिए इस्तेमाल होने वाला खाता) के तौर पर इस्तेमाल किया था।
हालांकि, आरोपियों ने सिर्फ वॉयस और व्हाट्सएप कॉल के जरिए बात करके और अपने मोबाइल फोन बंद रखकर पुलिस से बचने की कोशिश की, लेकिन असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर राखी और हेड कांस्टेबल अभय की मदद से लगातार टेक्निकल सर्विलांस, डिजिटल एनालिसिस और साइबर जांच के जरिए टीम ने राजस्थान के नवलगढ़ में एक किराए के मकान से आरोपियों को ढूंढ निकाला और गिरफ्तार कर लिया।
इस ऑपरेशन में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 21,000 रुपए नकद, साजिश रचने वालों को जोड़ने वाली व्हाट्सएप चैट, लाभार्थी की बैंक पासबुक और आधार कार्ड बरामद किए गए, जो इस मामले में अहम सबूत साबित हुए।














