उज्जैन। मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत शुक्रवार को उस वक्त सामने आ गई, जब उज्जैन के जिला अस्पताल में अचानक बिजली गुल हो गई। हालात ऐसे बने कि डॉक्टरों को मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज करना पड़ा। सुबह करीब 9 बजे हुई इस घटना के दौरान इमरजेंसी वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। वार्ड और ICU में भर्ती मरीज गर्मी और घुटन से परेशान हो उठे। अस्पताल के कई कमरों में पर्याप्त वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी नहीं होने के कारण अंधेरा छा गया।


टॉर्च की रोशनी में जारी रहा इलाज

बिजली जाते समय इमरजेंसी में 2-3 मरीजों की ड्रेसिंग चल रही थी। डॉक्टर बीच में इलाज नहीं रोक सकते थे, इसलिए उन्होंने मोबाइल टॉर्च जलाकर ही ड्रेसिंग पूरी की। करीब आधे घंटे तक अस्पताल अंधेरे में डूबा रहा, जिससे मरीजों और परिजनों में घबराहट का माहौल बन गया।


परिजनों ने जताई चिंता

एक मरीज के परिजन इसफाक खान ने बताया कि उनका भतीजा एक्सीडेंट के बाद भर्ती है। बिजली जाने के दौरान वह पसीने से तर और घबराया हुआ था। उन्होंने कहा कि यदि बिजली देर से आती तो हालत बिगड़ सकती थी। वहीं, ओपीडी में आए एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि बिजली कटने के कारण उन्हें अपने बच्चे के साथ पेड़ के नीचे बैठकर इंतजार करना पड़ा।


लिफ्ट खराब, बैकअप सिस्टम भी फेल

अस्पताल में लिफ्ट की समस्या भी लगातार बनी हुई है। मरीजों का कहना है कि लिफ्ट अक्सर खराब रहती है और बिजली जाने पर बैकअप सिस्टम भी काम नहीं करता। कई बार लोग लिफ्ट में फंसने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।


500 बेड का अस्पताल, फिर भी बदहाल व्यवस्था

यह जिला अस्पताल करीब 500 बेड क्षमता वाला है और वर्तमान में मेडिकल कॉलेज निर्माण के चलते इसे चरक अस्पताल में संचालित किया जा रहा है। यहां रोजाना 300 से अधिक मरीज ओपीडी में आते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।


सीएमएचओ का बयान भी सवालों में

मामले में सीएमएचओ अशोक पटेल ने कहा कि डीपी में फॉल्ट के कारण करीब 20 मिनट बिजली गई थी। हालांकि, बार-बार बिजली जाने और बैकअप सिस्टम को लेकर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा— “भैया, लाइट जाए तो इसमें मैं क्या कर सकता हूं।” इस घटना के बाद एक बार फिर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।