छतरपुर,विनोद मिश्रा। छतरपुर जिले में घरेलू रसोई गैस की किल्लत के बाद अब कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का संकट गहरा गया है, जिससे होटल एवं रेस्टोरेंट व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि कई नामी होटल और रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं जबकि कई बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। कुछ जगहों पर ताले लग चुके हैं और व्यवसाय ठप पड़ गया है।
यह संकट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने से उत्पन्न हुआ है, जिसके चलते कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। गैस एजेंसियों पर भारी भीड़ देखी जा रही है, जहां घरेलू सिलेंडर भी सीमित मात्रा में उपलब्ध हो रहे हैं। गैस एजेंसी संचालक हरगोविंद गांधी ने बताया कि घरेलू एलपीजी सीमित रूप से मिल रही है लेकिन कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति पूरी तरह बंद है। कई उपभोक्ताओं ने एक वर्ष में 14 सिलेंडर ले लिए हैं जिनकी केवाईसी नहीं है, जबकि शहरी क्षेत्र में 25 दिन और ग्रामीण में 45 दिन में सिलेंडर मिलने की अवधि है। कुछ लोगों की किताब बंद हो गई है क्योंकि 9 महीने में सिलेंडर नहीं लिया गया।
होटल एवं रेस्टोरेंट यूनियन के अध्यक्ष भगवत अग्रवाल ने बताया कि सिलेंडर न मिलने से संचालकों को मजबूरन कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे लागत बढ़ गई है, कामकाज प्रभावित हो रहा है और धुएं के कारण कर्मचारियों को भी परेशानी हो रही है। कई होटलों में तबा की रोटी, चाऊमीन जैसी चीजों को बंद करना पड़ा है और मेन्यू सीमित कर दिया गया है। कमर्शियल सिलेंडर की कमी से कोयले का उपयोग बढ़ा है, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है।
व्यापारियों ने सरकार से तत्काल समस्या के समाधान की मांग की है ताकि होटल-रेस्टोरेंट व्यवसाय और इससे जुड़े हजारों कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित न हो। केंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए उत्पादन बढ़ाया है लेकिन कमर्शियल सेक्टर में राहत अभी नहीं मिली है। यह संकट न केवल छतरपुर बल्कि मध्य प्रदेश के अन्य जिलों और देश के कई हिस्सों में देखा जा रहा है, जहां होटल-रेस्टोरेंट बंद होने या सीमित संचालन की स्थिति बनी हुई है।

