जयपुर। गुलाबी नगरी जयपुर के आईटीसी राजपूताना होटल में आयोजित एक उच्च स्तरीय निवेश सम्मेलन में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विकास का एक ऐसा खाका पेश किया है, जिसने राजस्थान और मध्य प्रदेश के आर्थिक रिश्तों को एक नई परिभाषा दे दी है। 'इंटरएक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटीज' के माध्यम से मुख्यमंत्री ने न केवल प्रदेश की प्राकृतिक संपदा और बुनियादी ढांचे का प्रदर्शन किया, बल्कि निवेश की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अपनी सरकार की अटूट प्रतिबद्धता भी जताई। इस पूरे संवाद का सार उन आकर्षक प्रस्तावों और नीतिगत बदलावों में छिपा है, जो निवेशकों को मध्य प्रदेश की ओर खींचने के लिए एक 'चुंबकीय शक्ति' के रूप में तैयार किए गए हैं।
राजस्थान के साथ साझा विरासत और प्रधानमंत्री का विजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन की शुरुआत बेहद भावनात्मक और रणनीतिक अंदाज में की, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश और राजस्थान को 'जुड़वा भाई' करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि दोनों राज्यों की भौगोलिक और सांस्कृतिक समानताएं व्यापारिक विस्तार के लिए एक आदर्श धरातल तैयार करती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार के आशीर्वाद से अब व्यापार करना पहले के मुकाबले कहीं अधिक सुगम हो गया है। उन्होंने उद्योगपतियों को प्रोत्साहित किया कि वे राजस्थान में अपना आधार मजबूत रखते हुए मध्य प्रदेश की असीम संभावनाओं का लाभ उठाएं, जिससे दोनों राज्यों की प्रगति को एक साथ रफ्तार मिल सके।
मेडिकल सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव और पीपीपी मॉडल का आकर्षण
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में निवेश को लेकर मुख्यमंत्री ने एक बेहद चौंकाने वाला और उदार प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए मात्र 1 रुपये में 30 एकड़ जमीन उपलब्ध कराएगी। इतना ही नहीं, सरकार 300 बेड का अस्पताल भी 10 साल के संचालन के लिए सौंपने को तैयार है। बच्चों की शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्होंने कहा कि मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लोन की जिम्मेदारी भी सरकार वहन करेगी। यह कदम न केवल राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को आधुनिक बनाएगा, बल्कि बड़े कॉर्पोरेट घरानों के लिए चिकित्सा क्षेत्र में निवेश के नए द्वार भी खोलेगा।
सरप्लस बिजली का दावा और 30 प्रतिशत की भारी सब्सिडी
निवेशकों को लुभाने के लिए मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश की 'ऊर्जा शक्ति' का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने गर्व से साझा किया कि आज मध्य प्रदेश के पास इतनी बिजली है कि उससे दिल्ली की मेट्रो ट्रेनें भी दौड़ रही हैं। किफायती दरों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति का भरोसा देते हुए उन्होंने सब्सिडी के गणित को स्पष्ट किया। यदि कोई निवेशक 100 करोड़ रुपये की लागत से होटल या अस्पताल बनाना चाहता है, तो राज्य सरकार सीधे 30 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान करेगी। यह वित्तीय प्रोत्साहन पर्यटन और स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
26 अनुकूल नीतियां और प्रक्रियाओं का सरलीकरण
औद्योगिक क्रांति के अपने मिशन को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 26 अलग-अलग प्रकार की अनुकूल नीतियां लागू की गई हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नीतियों का सरलीकरण केवल कागजी कार्रवाई कम करने के लिए नहीं, बल्कि उद्योगपतियों के लाभ और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के लिए किया गया है। माइनिंग से लेकर हेल्थ और आईटी से लेकर टूरिज्म तक, हर सेक्टर के लिए विशिष्ट और लचीली योजनाएं तैयार हैं। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—प्रक्रियाओं को इतना सरल बनाना कि निवेश प्रस्ताव बिना किसी देरी के धरातल पर उतर सकें और मध्य प्रदेश देश के सबसे पसंदीदा इन्वेस्टमेंट हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर सके।



