छतरपुर, विनोद मिश्रा। बीते रोज मुख्यमंत्री के पुतला दहन के दौरान हुए भीषण हादसे में झुलसे कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों का हाल जानने के लिए गुरुवार को कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने सक्रियता दिखाई। जिला अस्पताल में उपचाराधीन घायलों से प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने वीडियो कॉल के माध्यम से चर्चा कर उनका ढांढस बंधाया। गुरुवार को कांग्रेस के पूर्व विधायक नीरज दीक्षित ने घायलों की बात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और राष्ट्रीय सचिव कुनाल चौधरी से वीडियो कॉल के जरिए कराई। वहीं, कांग्रेस नेत्री दीप्ति पांडेय ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से घायलों का संपर्क कराया। यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया ने भी कार्यकर्ताओं के स्वास्थ्य की जानकारी ली। अस्पताल में घायलों को देखने पूर्व विधायक आलोक चतुर्वेदी भी पहुंचे।


अस्पताल पहुंचे पूर्व विधायक आलोक चतुर्वेदी ने पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा जब भाजपा प्रदर्शन करती है तो पुलिस उन्हें संरक्षण देती है, लेकिन जब कांग्रेस जनता के मुद्दों पर आवाज उठाती है तो ज्यादती की जाती है। क्या हमें लोकतंत्र में आवाज उठाने का भी हक नहीं है? उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में होने वाले हर प्रदर्शन में वे स्वयं सबसे आगे रहेंगे और पुलिस की किसी भी अवैध रोक-टोक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कि यह पूरा घटनाक्रम बुधवार को शहर की बिगड़ती कानून व्यवस्था और एक पत्रकार के साथ हुई मारपीट के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान हुआ। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पुतला दहन करने के लिए निकले थे, तभी छत्रसाल चौराहे के पास पुलिस ने उन्हें रोककर पुतला छीनने का प्रयास किया। इसी झूमाझटकी के बीच पेट्रोल से भीगे पुतले में आग लग गई, जिसने विकराल रूप धारण कर लिया। हादसे में यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष कपिल रिछारिया, सचिन सिंह मातगुवां, मनमोहन कुशवाहा पड़रिया और कपेन्द्र सिंह घोष के अलावा पुलिसकर्मी आशीष खरे और संदीप वर्मा भी झुलस गए थे, जिनका जिला अस्पताल में इलाज जारी है। जानकारी मिली है कि हादसे के बाद जब घायलों को जिला अस्पताल लाया गया, तो वहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं और डॉक्टरों के बीच तीखी बहस हो गई। डॉक्टरों का आरोप था कि कार्यकर्ताओं ने अभद्रता की, जिसके कारण कुछ देर के लिए काम बंद करने की स्थिति बन गई थी, जबकि कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। पुलिस की समझाइश और भारी बल की तैनाती के बाद घायलों का उपचार सुचारू हो सका।