चैत्र नवरात्रि महासप्तमी (25 मार्च 2026) के अवसर पर देशभर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा है। इस दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है, जिन्हें भय और दुखों को दूर करने वाली देवी माना जाता है।


मां कालरात्रि की पूजा और भोग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके बाद इस प्रसाद को भक्तों में वितरित किया जाता है।


सुहागिन महिलाओं की विशेष परंपरा

महासप्तमी के दिन सुहागिन महिलाएं माता को खोइछा (सूखे मेवे, सिंदूर और साड़ी) अर्पित करती हैं। यह परंपरा सुख-समृद्धि और परिवार की रक्षा के लिए की जाती है।


मंदिरों में भक्तों की भीड़

देशभर के मंदिरों में सुबह से ही विशेष श्रृंगार, पूजा-अर्चना और भक्ति कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे धार्मिक माहौल और भी उत्साहपूर्ण हो गया है। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा और जीवन में साहस व शक्ति की प्राप्ति होने की मान्यता है।