घोषणाओं की चमक और दफ्तरों का अंधेरा: पटवारी ने कहा- खाली कुर्सियों के कारण दम तोड़ रहा है प्रदेश का कृषि तंत्र
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भोपाल (जीतेन्द्र यादव)। मध्यप्रदेश में एक ओर जहाँ मोहन सरकार साल 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' के रूप में मना रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश का कृषि प्रशासनिक ढांचा खुद ही 'वेंटिलेटर' पर नजर आ रहा है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर राज्य के कृषि तंत्र की जो तस्वीर पेश की है, वह चौंकाने वाली है। जीतू पटवारी का दावा है कि राज्य के कृषि विभाग सहित तमाम सहयोगी विभागों में पदों की "ऐतिहासिक रिक्तता" है, जो सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ी खाई पैदा कर रही है।
60% खाली कुर्सी: कौन सुनेगा किसान की फरियाद?
जीतू पटवारी ने आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरते हुए बताया कि जिस विभाग के कंधे पर प्रदेश के करोड़ों किसानों की जिम्मेदारी है, वह खुद ही लाचार है। कृषि विभाग में स्वीकृत 14,537 पदों में से 8,468 पद खाली पड़े हैं। यानी विभाग का लगभग 60% अमला गायब है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन के शीर्ष स्तर पर अपर संचालक से लेकर उप संचालक तक के 182 पदों में से 113 खाली हैं। पटवारी का सवाल है कि जब योजनाएं बनाने वाले और उन्हें लागू करने वाले अधिकारी ही नहीं होंगे, तो 'कृषक कल्याण' केवल विज्ञापनों तक ही सीमित रह जाएगा।
सहयोगी विभागों का भी बुरा हाल: 'सिस्टम' में लगा घुन
यह बदहाली केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है। पटवारी द्वारा साझा किए गए आंकड़े बताते हैं कि कृषि से जुड़े हर स्तंभ में रिक्तियों का अंबार है:
उद्यानिकी विभाग: यहाँ लगभग 47% पद रिक्त हैं।
मत्स्य पालन: 1,290 पदों में से 722 पद खाली पड़े हैं।
पशुपालन एवं डेयरी: यहाँ भी 22% अमले की कमी है।
खाद्य तंत्र: संचालनालय में 109 पदों के विरुद्ध मात्र 48 कर्मचारी ही तैनात हैं।
इतना ही नहीं, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, जो किसानों और सरकार के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं, उनके भी 60% पद खाली हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी कमी के चलते फसल नुकसान का सर्वे और सॉइल हेल्थ कार्ड जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं फेल हो रही हैं।
निशाने पर सरकार
जीतू पटवारी ने इस पत्र के जरिए एक बड़ा राजनीतिक वार भी किया है। उन्होंने वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि वे दो दशकों तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उन्होंने संस्थागत क्षमता निर्माण के बजाय केवल घोषणाओं पर ध्यान दिया। वहीं, वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में आज केवल 'घोषणाओं की खेती' हो रही है, जबकि प्रशासनिक जमीन पूरी तरह बंजर हो चुकी है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार ने कृषि तंत्र को मजबूत करने के बजाय उसे विज्ञापनों का जरिया बना लिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से तीन प्रमुख मांगें की हैं:
मध्यप्रदेश के कृषि विभागों में रिक्त पदों की तत्काल उच्च स्तरीय समीक्षा की जाए।
किसानों से जुड़े विभागों में शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए जाएं।
जमीनी स्तर पर प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति तैयार हो।
पटवारी ने पत्र के अंत में कड़ी चेतावनी देते हुए लिखा है कि मध्यप्रदेश का किसान आज केवल मौसम की मार से नहीं, बल्कि सरकारी दफ्तरों की 'खाली कुर्सियों' से भी लड़ रहा है। अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री को लिखे इस पत्र के बाद क्या केंद्र सरकार मध्यप्रदेश के कृषि ढांचे में कोई बड़ा फेरबदल या भर्ती अभियान चलाने का निर्देश देती है।



