आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: विकास की दौड़ में सबसे आगे निकला मध्यप्रदेश

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आम नागरिक से लेकर किसान और उद्योग तक सब मजबूत
भोपाल (Peptech Exclusive) । मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जारी ताजा आर्थिक सर्वेक्षण ने राज्य की प्रगति की एक नई और बुलंद तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में अग्रणी बन गया है जो सबसे तेज गति से विकास कर रहे हैं। राज्य की कुल अर्थव्यवस्था (जीएसडीपी) 16.69 लाख करोड़ तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.14% अधिक है। इस विकास की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि राज्य के आम नागरिक की आर्थिक स्थिति में भारी सुधार हुआ है। प्रति व्यक्ति औसत सालाना आय, जो पहले मात्र 38,497 थी, अब बढ़कर 1,69,050 हो गई है। यह आंकड़ा बताता है कि सरकार की नीतियां सीधे आम आदमी की जेब तक लाभ पहुंचा रही हैं।
खेती और पशुपालन में किसानों की चांदी

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प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले कृषि क्षेत्र में इस बार रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन देखने को मिला है। फसल उत्पादन में 7.66% और कुल खाद्यान्न उत्पादन में करीब 15% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। केवल अनाज ही नहीं, बल्कि पशुपालन के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य का दूध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुंच गया है। उत्पादन में इस वृद्धि का सीधा फायदा किसानों को मिला है, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर दोनों में सकारात्मक बदलाव आया है।
नए उद्योगों से खुलेंगे रोजगार के द्वार

भारत पहुंचा सबसे बड़ा कंटेनर
मध्यप्रदेश अब उद्योगों और निवेश के लिए देश का नया पसंदीदा केंद्र बनता जा रहा है। सरकार ने उद्योगों के विस्तार के लिए 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की है। इस पहल से राज्य में 1.17 लाख करोड़ का नया निवेश आने की संभावना है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस भारी-भरकम निवेश से प्रदेश के युवाओं के लिए करीब 1.7 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही व्यापार, होटल और सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) में भी 15.80% की तेज ग्रोथ दर्ज की गई है, जो शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति दे रही है।
पर्यटन का नया रिकॉर्ड

मध्यप्रदेश का प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक स्थलों की बात करें तो वे अब दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहे हैं। इस वर्ष रिकॉर्ड 13.18 करोड़ पर्यटक मध्यप्रदेश पहुंचे, जो पर्यटन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान है। पर्यटन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए जरिए खुले हैं। वहीं शहरी विकास की बात करें तो प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 8.75 लाख गरीबों के घर बनकर तैयार हो चुके हैं। स्वच्छता के मामले में भी प्रदेश का डंका बज रहा है, जिसे स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में मिले 8 राष्ट्रीय पुरस्कारों ने साबित कर दिया है।
स्वास्थ्य और शिक्षा में ऐतिहासिक सुधार

सरकार ने सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर भी विशेष ध्यान दिया है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में 4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी करना एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज की गारंटी मिली है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का ही परिणाम है कि मातृ मृत्यु दर 379 से घटकर अब मात्र 142 रह गई है। शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश एक मॉडल स्टेट बनकर उभरा है। बजट का 10.37% हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया जा रहा है, जिससे प्राथमिक स्कूलों (कक्षा 1 से 5) में बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर अब शून्य हो गई है।
मजबूत और अनुशासित सरकारी खजाना
इन तमाम विकास कार्यों और बड़ी योजनाओं के बावजूद मध्यप्रदेश का वित्तीय प्रबंधन बेहद शानदार रहा है। राज्य का खजाना 618 करोड़ के राजस्व मुनाफे में है, यानी सरकार अपनी कमाई से कम खर्च कर रही है और विकास में पैसा लगा रही है। राज्य पर कर्ज का बोझ भी नियंत्रण में है और यह कुल अर्थव्यवस्था (जीएसडीपी) का केवल 31.3% है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि मध्यप्रदेश विकास के साथ-साथ वित्तीय रूप से भी एक आत्मनिर्भर और मजबूत राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


