निवाड़ी। मध्य प्रदेश में निगम-मंडलों में हो रही राजनीतिक नियुक्तियों ने जहां कई नेताओं के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी है, वहीं निवाड़ी जिले में भाजपा के भीतर ही 'बगावत' के सुर तेज हो गए हैं। ताजा मामला महेश केवट को मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाए जाने से जुड़ा है। इस नियुक्ति के बाद स्थानीय कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है और पार्टी के अनुशासित सिपाही इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।
विवाद की मुख्य वजह महेश केवट का पिछला राजनीतिक रिकॉर्ड है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि ओरछा नगरीय निकाय चुनाव के दौरान महेश केवट पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे थे। अनुशासनहीनता के चलते भाजपा संगठन ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। अब कार्यकर्ताओं का सवाल यह है कि जिस नेता को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाया था, उसे अचानक इतना अहम और गौरवशाली पद देकर कैसे पुरस्कृत कर दिया गया?
24 अप्रैल की शाम जैसे ही मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग द्वारा महेश केवट की नियुक्ति का आदेश जारी हुआ, निवाड़ी और ओरछा के भाजपा गलियारों में सुगबुगाहट शुरू हो गई। दबी जुबान में कार्यकर्ता इसे "निष्ठावान कार्यकर्ताओं का अपमान" बता रहे हैं। पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं का कहना है कि जो लोग विपरीत समय में पार्टी के साथ खड़े रहे, उन्हें दरकिनार कर निष्कासित नेताओं को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देना संगठन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे बवाल पर जिले के वरिष्ठ भाजपा पदाधिकारी और जिम्मेदार नेता कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। हालांकि, उनकी यह खामोशी विरोध की आग को और हवा दे रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर संगठन ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आगामी समय में पार्टी के भीतर गुटबाजी और असंतोष की स्थिति और विकराल हो सकती है।



