भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के विकास और किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए किसानों को बड़ी राहत देते हुए समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं पर 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का फैसला किया है। इसके साथ ही, लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों और सड़कों के रखरखाव के लिए 4,525 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को भी मंजूरी दी गई है।


धार्मिक नगरी उज्जैन और रीवा को विशेष सौगात

कैबिनेट ने उज्जैन शहर की यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए एक बड़े प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है। उज्जैन में चिमनगंज मंडी से इंदौर गेट तक 4-लेन और निकास चौराहा से इंदौर गेट तक 2-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। 5.32 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट के लिए 945 करोड़ 20 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं, विंध्य क्षेत्र के रीवा जिले के लिए पनवार माइक्रो सिंचाई परियोजना को प्रशासनिक स्वीकृति मिली है। 228 करोड़ 42 लाख रुपये की इस योजना से जवा और त्योंथर तहसील के 37 गांवों की 7,350 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।


बदला गया विभाग का नाम: अब 'गौपालन' पर विशेष फोकस

एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेते हुए मंत्रि-परिषद ने पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग का नाम बदलने की स्वीकृति दी है। अब यह विभाग 'गौपालन एवं पशुपालन विभाग' के नाम से जाना जाएगा। इसी तरह संचालनालय का नाम भी बदलकर संचालनालय, गौपालन एवं पशुपालन किया गया है। यह बदलाव प्रदेश सरकार की गौ-संरक्षण और संवर्धन की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।


सड़कों और भवनों के रखरखाव के लिए बड़ा बजट

लोक निर्माण विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों की निरंतरता के लिए बजट आवंटित किया गया है:
एमपी रोड डेवलपमेंट प्रोग्राम (6 व 7): वर्ष 2031 तक की निरंतरता के लिए लगभग 3,019 करोड़ रुपये स्वीकृत।
शासकीय व विश्राम गृह रखरखाव: आगामी 5 वर्षों के लिए 200 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान।

शौर्य स्मारक व मंत्रालय भवन: सतपुड़ा, विंध्याचल और शौर्य स्मारक के संधारण हेतु 300 करोड़ 70 लाख रुपये मंजूर।


गेहूं उपार्जन और अन्य प्रशासनिक संशोधन

किसानों से खरीदे गए गेहूं में से सरप्लस मात्रा का निपटान अब 'स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन' खुली निविदा के माध्यम से करेगा, जिसका व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। इसके अलावा, "मध्यप्रदेश भण्डार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम" को अब MSME विभाग से हटाकर वित्त विभाग के अंतर्गत कर दिया गया है, ताकि खरीद प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता और वित्तीय नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।