एक जिला-एक उत्पाद, नए अस्पताल, युवा इंटर्नशिप... मोहन कैबिनेट के जनकल्याण के बड़े कदम

Advertisement
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य सरकार ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और सात विभागों की महत्वपूर्ण योजनाओं को अगले पाँच वर्षों तक जारी रखने के लिए कुल लगभग 33 हजार 240 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। बैठक में मुख्यमंत्री युवा इंटर्न्स फॉर सुशासन कार्यक्रम को मंजूरी दी गई, साथ ही सिंगरौली जिले में न्यायिक पदों का सृजन, नए औषधालयों की स्थापना, विकलांग व्यक्तियों को व्यावसायिक कर से छूट की निरंतरता, एक जिला-एक उत्पाद परियोजना, विद्युत वितरण योजना के तहत केंद्रांश पर एसजीएसटी की राशि का अंशपूंजी के रूप में वितरण, ग्रामीण अवसंरचना विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी, जनजातीय कार्य, महिला एवं बाल विकास तथा सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की योजनाओं के लिए बड़ी राशियों की मंजूरी दी गई। इन निर्णयों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन, स्वास्थ्य सुविधाएँ, शिक्षा, स्टार्टअप और स्थानीय उद्यमिता को मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के विकास और जनकल्याण के लिए कई बड़े फैसले लिए गए। मंत्रिपरिषद ने सात विभागों की योजनाओं की निरंतरता के लिए कुल 33,240 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी, जिसमें विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रम शामिल हैं। मुख्यमंत्री युवा इंटर्न्स फॉर सुशासन कार्यक्रम को तीन वर्षों के लिए 190 करोड़ रुपये की मंजूरी प्रदान की गई, जिसके तहत लोक सेवा प्रबंधन विभाग को क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है। सिंगरौली जिले के चितरंगी में व्यवहार न्यायालय स्थापना के लिए कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश का एक पद और कार्यालयीन अमले के छह पदों सहित कुल सात नए पदों का सृजन स्वीकृत किया गया। मैहर (मैहर जिला), कैमोर (कटनी जिला) और निमरानी (खरगोन जिला) में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के तीन नए औषधालय खोलने तथा चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ के 51 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई, जिससे लगभग 15,686 श्रमिकों और उनके 62,744 परिजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। मध्य प्रदेश व्यावसायिक कर अधिनियम, 1995 के तहत विकलांग व्यक्तियों को व्यावसायिक कर से छूट को 31 मार्च 2030 तक जारी रखने की स्वीकृति प्रदान की गई।
एक जिला-एक उत्पाद परियोजना को मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने एक जिला-एक उत्पाद परियोजना के तहत सात जिलों में पारंपरिक एवं विशिष्ट उत्पादों के संरक्षण, विकास और विपणन के लिए आगामी पाँच वर्षों में 37.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। चयनित जिलों में सीधी में दरी एवं कारपेट, दतिया में गुड़, अशोकनगर में चंदेरी हाथकरघा वस्त्र, भोपाल में जरी-जरदोजी एवं जूट उत्पाद, धार में बाग प्रिंट, सीहोर में लकड़ी के खिलौने तथा उज्जैन में बटिक प्रिंट शामिल हैं। इस परियोजना से स्थानीय शिल्पकारों, बुनकरों और कारीगरों को प्रशिक्षण, डिजिटलीकरण, ब्रांडिंग, विपणन तथा बाजार उपलब्धता जैसी सुविधाएँ मिलेंगी, जिससे स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण होगा।
स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
मंत्रिपरिषद ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम के अंतर्गत तीन नए औषधालयों की स्थापना को मंजूरी दी, जिसमें मैहर, कैमोर और निमरानी शामिल हैं। इन औषधालयों के लिए चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ के 51 नए पद सृजित किए गए हैं। इससे बड़ी संख्या में श्रमिक परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ प्राप्त होंगी, जो राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
युवाओं के लिए सुशासन कार्यक्रम
मुख्यमंत्री युवा इंटर्न्स फॉर सुशासन कार्यक्रम को तीन वर्षों के क्रियान्वयन के लिए 190 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई। लोक सेवा प्रबंधन विभाग को इसकी अग्रिम कार्यवाही, प्रक्रिया निर्धारण तथा नियम-निर्देश जारी करने का अधिकार दिया गया है। यह कार्यक्रम युवाओं को सुशासन में भागीदारी का अवसर प्रदान करेगा और प्रशासनिक कार्यों में नवाचार लाएगा।
ग्रामीण विकास एवं अन्य क्षेत्रों के लिए बड़ी राशियाँ
मंत्रिपरिषद ने ग्रामीण, पिछड़े एवं खनिज क्षेत्रों में अवसंरचना एवं पेयजल आपूर्ति के लिए 6,090 करोड़ रुपये, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के लिए 7,127 करोड़ रुपये, योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की 10 योजनाओं के लिए 2,064 करोड़ रुपये, अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के विकास एवं पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 1,645 करोड़ रुपये, महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के लिए 3,773 करोड़ रुपये तथा स्टार्टअप नीति एवं निवेश संवर्धन के लिए 11,361 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। इनमें रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत केंद्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि को वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में प्रदान करने का निर्णय भी शामिल है। ये फैसले राज्य के समग्र विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूती प्रदान करेंगे।


