मोहन कैबिनेट का 'किसान मास्टरस्ट्रोक': उड़द की खेती पर ₹600 प्रति क्विंटल बोनस, सरसों के लिए भी भावांतर योजना

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भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में संपन्न हुई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले कई क्रांतिकारी निर्णय लिए गए। सरकार ने कृषि क्षेत्र को लाभप्रद बनाने के उद्देश्य से ऐतिहासिक फैसला लेते हुए उड़द की फसल पर प्रति क्विंटल 600 रुपये बोनस देने की घोषणा की है। इसके साथ ही, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने हेतु प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए पदाधिकारियों की योग्यता के नए मापदंड तय कर दिए गए हैं।
उड़द की खेती को प्रोत्साहन, सरसों पर भी भावांतर का कवच
कैबिनेट बैठक की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्रीष्मकालीन मूंग के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को देखते हुए अब सरकार उड़द के रकबे को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। वर्तमान में उड़द का समर्थन मूल्य 7800 रुपये प्रति क्विंटल है, जिस पर राज्य सरकार अपनी ओर से 600 रुपये का अतिरिक्त बोनस देगी। इस निर्णय से प्रदेश में उड़द का उत्पादन 5 लाख हेक्टेयर तक पहुँचने का अनुमान है। वहीं, सोयाबीन के सफल प्रयोग के बाद अब सरसों की खरीदी के लिए भी भावांतर योजना लागू कर दी गई है। ऐसा करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।
प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग के स्वरूप में बदलाव
प्रशासनिक सुधारों की दिशा में सरकार ने 12 मार्च 2024 के राजपत्र में प्रकाशित निर्देशों को संशोधित किया है। अब प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग का अध्यक्ष वही व्यक्ति होगा जिसके पास पर्याप्त प्रशासनिक अनुभव हो और जो प्रमुख सचिव स्तर की योग्यता रखता हो। आयोग में दो सदस्य होंगे, जिनके लिए केंद्र या राज्य सरकार में कम से कम 20 वर्ष की सेवा और सचिव पद से सेवानिवृत्ति अनिवार्य होगी। सचिव के पद पर भी अपर सचिव स्तर के सेवानिवृत्त अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। इन नियुक्तियों में पारदर्शिता हेतु यह भी स्पष्ट किया गया है कि सेवानिवृत्त अधिकारियों को देय मानदेय में से उनकी पूर्व पेंशन की राशि घटाई जाएगी।
खनिज संपदा का आधुनिक प्रबंधन और ढांचागत विकास
खनिज अन्वेषण और विकास को गति देने के लिए कैबिनेट ने नवीन भवन निर्माण हेतु 34 करोड़ 2 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस नवीन परिसर में स्टेट कमांड सेंटर, आईटी शाखा और अत्याधुनिक रासायनिक प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी, जिससे जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) की मॉनिटरिंग और भी सुदृढ़ होगी। साथ ही, जिला माईनिंग फंड योजना को आगामी पांच वर्षों यानी 2030-31 तक निरंतर जारी रखने का निर्णय लिया गया है, ताकि खनन प्रभावित क्षेत्रों में जनहित के कार्य प्रभावित न हों।
कृषि क्षेत्र के लिए 10,493 करोड़ का 'पंचामृत' बजट
'किसान कल्याण वर्ष' को चरितार्थ करते हुए कैबिनेट ने अगले पांच वर्षों के लिए पांच प्रमुख मिशनों को मंजूरी दी है। खाद्य सुरक्षा पोषण मिशन के तहत दलहन और मोटे अनाज के विस्तार हेतु 3285.49 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने वाली 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' योजना के लिए 2293.97 करोड़ और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 2008.68 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, प्राकृतिक खेती के लिए 1011.59 करोड़ और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के लिए 1793.87 करोड़ रुपये की निरंतरता को मंजूरी देकर सरकार ने कृषि क्षेत्र में स्वावलंबन का रोडमैप तैयार कर दिया है।


