भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 'शहर सरकार' की सबसे महत्वपूर्ण बैठक हंगामे की भेंट चढ़ती नजर आई, जहाँ विकास के दावों से ज्यादा विवादों की गूँज सुनाई दी। नगर निगम परिषद की इस बैठक में जहाँ एक ओर करीब 3500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पेश होने की तैयारी थी, वहीं दूसरी ओर प्रश्नकाल की शुरुआत ही गोमांस और स्लॉटर हाउस जैसे संवेदनशील मुद्दों से हुई। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंक-झोंक के बीच जनता की बुनियादी सुविधाओं और पिछले दो वर्षों से अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। इस पूरी गहमागहमी का सार उन फाइलों में छिपा है जो सालों से धूल फांक रही हैं, जबकि शहर की नई रूपरेखा तैयार करने के लिए वादों की एक नई फेहरिस्त सामने रखी गई है।
सदन में गोमांस पर संग्राम और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
नगर निगम की बैठक शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष शाबिस्ता जकी ने गोमांस और स्लॉटर हाउस के संचालन को लेकर पहला प्रश्न दाग दिया, जिस पर एमआईसी सदस्य आर.के. सिंह बघेल के जवाब ने सदन का पारा चढ़ा दिया। इस मुद्दे पर केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ पार्षदों ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। बहस इतनी बढ़ गई कि महापौर और नेता प्रतिपक्ष के बीच तीखी व्यक्तिगत नोंक-झोंक देखने को मिली। कांग्रेस की ओर से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाकर इस विवाद को एक नया राजनीतिक आयाम देने की कोशिश की गई, जिससे बजट सत्र का मुख्य एजेंडा हाशिए पर आता दिखा।
अधूरे हेरिटेज गेट और फाइलों में सिमटा विकास
भोपाल के ऐतिहासिक स्वरूप को सहेजने के लिए पिछले दो सालों से सात हेरिटेज गेट और गीता भवन बनाने जैसे लुभावने वादे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में अब तक केवल दो गेटों का भूमिपूजन ही हो सका है। 3500 करोड़ के नए बजट में एक बार फिर शहर के कायाकल्प की बातें कही जा रही हैं, जबकि पिछले साल घोषित की गई 'महापौर स्मार्ट पास' जैसी योजनाएं साल भर बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। जनता के बीच यह चर्चा आम है कि जब पुराने वादे ही वेंटिलेटर पर हैं, तो नए बजट के प्रावधानों को अमलीजामा कैसे पहनाया जाएगा। विपक्ष ने इसी विफलता को आधार बनाकर नई बिल्डिंग के निर्माण और लोकायुक्त की कार्यवाहियों के मुद्दों पर घेराबंदी की रणनीति तैयार की है।
टैक्स का बोझ और जनप्रतिनिधियों की बढ़ती निधि
पिछले बजट के अनुभवों ने भोपाल की जनता को काफी मायूस किया था, जहाँ प्रॉपर्टी टैक्स में 10% और जलकर में 15% की भारी बढ़ोतरी की गई थी। एक तरफ पौने तीन लाख नल कनेक्शन धारियों और साढ़े पांच लाख से अधिक संपत्ति कर दाताओं पर आर्थिक बोझ डाला गया, वहीं दूसरी तरफ पार्षदों और महापौर की सालाना निधि को दोगुना कर दिया गया। हालांकि, इस बार मंत्रियों और विधायकों की ओर से बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए टैक्स न बढ़ाने का दबाव है, लेकिन पिछले घाटे और अधूरे प्रोजेक्ट्स की भरपाई कैसे होगी, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रशासनिक सख्ती के दौर में अब देखना यह होगा कि भोपाल नगर निगम अपनी जवाबदेही को किस तरह सुनिश्चित करता है।



