भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अब शासन आइवरी टावर (यानी आम लोगों से दूर, ऊंचे महलों) से नहीं चलाया जा रहा है, बल्कि सरकार खुद लोगों के पास पहुंच रही है और जमीनी स्तर पर उनकी समस्याओं को सुन रही है।लोक सेवा भवन के कन्वेंशन सेंटर में सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2026 के राज्यस्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन चरण माझी ने कहा, "हमारी सरकार का जन शिकायत निवारण कार्यक्रम जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार को रोकने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम के माध्यम से लोग सामने आने वाले भ्रष्टाचार की जानकारी मंत्रियों और मुख्यमंत्री तक पहुंचाते हैं और उसके अनुसार कार्रवाई की जाती है।"
इस अवसर पर, मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और अन्य प्रतिभागियों को ईमानदारी की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा, "सतर्कता विभाग सुशासन की आंख और कान है। सुशासन केवल नीतियां और योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असली अर्थ भ्रष्टाचार को पूरी तरह से रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी धन सही लाभार्थियों तक पूरी तरह से पहुंचे।"
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 'ओडिशा विजिलेंस' को और अधिक कुशल और मजबूत बनाने के लिए व्यापक कदम उठा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जेएएम (जन धन, आधार, मोबाइल) प्रणाली के लिए धन्यवाद देते हुए माझी ने कहा कि पीएम मोदी ने जमीनी स्तर से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया है।
इस प्रणाली ने सरकारी धन के गलत इस्तेमाल और लीकेज को पूरी तरह से रोक दिया है और यह गरीबों के लिए एक वरदान है।
मुख्यमंत्री ने बताया, "हमारी सरकार ने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए तीन रणनीतियां अपनाई हैं। इनमें भ्रष्टाचार के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति; अधिकारी के पद या कार्यकाल की परवाह किए बिना खुफिया जानकारी के आधार पर कानूनी कार्रवाई करना और भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़े गए अधिकारियों को सजा दिलाना शामिल हैं।
उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि सतर्कता विभाग इन रणनीतियों को निडरता और पेशेवर तरीके से लागू कर रहा है।
उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में ओडिशा विजिलेंस ने कई अन्य अधिकारियों के अलावा एक आईएएस अधिकारी, मुख्य अभियंता रैंक के आठ अधिकारियों, दो प्रभागीय वन अधिकारियों (डीएफओ), आबकारी और राज्य परिवहन प्राधिकरण के संयुक्त आयुक्तों, खान विभाग के तीन उप-निदेशकों, पांच तहसीलदारों और चार ब्लॉक विकास अधिकारियों (बीडीओ) के खिलाफ कार्रवाई की है।
भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद 41 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि इसी अवधि के दौरान 91 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन रोक दी गई है। माझी ने बताया कि 2025 में ओडिशा विजिलेंस की दोषसिद्धि दर (कनविक्शन रेट) 50 प्रतिशत थी, जो इस साल सितंबर तक बढ़कर 65 प्रतिशत हो गई है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए ओडिशा आईटी नीति को मंजूरी दी है। भ्रष्टाचार की आशंका वाले क्षेत्रों और भ्रष्टाचार में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए ओडिशा विजिलेंस के भीतर एक प्रिवेंटिव विजिलेंस रिसर्च विंग (निवारक सतर्कता अनुसंधान शाखा) बनाई जा रही है।
इस साल की थीम समृद्धि के लिए ईमानदारी का जिक्र करते हुए मोहन चरण माझी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में मजबूत नैतिक मूल्य, पारदर्शिता और ईमानदारी बहुत जरूरी हैं।
उन्होंने सरकारी कर्मचारियों से ईमानदारी और समर्पण दिखाने का आग्रह किया और सभी से ईमानदारी को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।













