रायगढ़ //छत्तीसगढ़ (रोहित तिर्की) - जनपद पंचायत धरमजयगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत सोनपुर में बदहाल सड़कों और पंचायत व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों एवं युवाओं की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। गांव की सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे और कीचड़ के कारण आवागमन में हो रही परेशानी से परेशान युवाओं ने पंचायत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखने के बजाय खुद ही सड़क सुधारने का बीड़ा उठा लिया।


शनिवार को गांव के युवाओं ने आपसी सहयोग से चंदा एकत्रित किया, गांव के ही ट्रैक्टर में डीजल डलवाया और मुरूम मंगाकर सोनपुर से गीतखोंता पंडोपारा जाने वाले कच्चे मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढों और दलदली हिस्सों में मुरूम डालना शुरू किया। ग्रामीणों के इस प्रयास ने पंचायत की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।


“सरपंच साहब जवाब दीजिए… मौन क्यों हैं?”


ग्रामीणों का कहना है कि गांव की बदहाल स्थिति और सड़क की समस्या को लेकर सरपंच एवं सचिव को कई बार मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन आरोप है कि समस्या का अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। इसके बाद युवाओं और ग्रामीणों ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी।


गांव के व्हाट्सएप समूह में पंचायत की कार्यप्रणाली, विकास कार्यों और पंचायत को मिलने वाली शासकीय राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठाए गए। पंचायत भवन की बदहाल स्थिति का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने पूछा कि जब पंचायत में विकास के लिए शासकीय राशि आती है, तो उसका असर जमीन पर क्यों नजर नहीं आता?


इसी दौरान कुछ युवाओं ने तीखे शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा—“सरपंच साहब जवाब दीजिए, मौन क्यों धारण किए हैं? अगर काम नहीं कर पा रहे हैं तो इस्तीफा दे दीजिए।” वहीं कुछ ग्रामीणों ने पंचायत की कथित निष्क्रियता के खिलाफ आंदोलन तेज करने की बात भी कही।


रक्षाबंधन के दिन भी सोशल मीडिया पर छाया पंचायत का मुद्दा


ग्रामीणों के अनुसार, शुक्रवार 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व के दौरान भी ग्राम पंचायत सोनपुर में सरपंच-सचिव की कथित निष्क्रियता को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चाएं होती रहीं। पंचायत में विकास कार्यों के लिए आने वाली राशि और उसके उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए।


हालांकि, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर सरपंच एवं सचिव की ओर से सोशल मीडिया समूह में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आने की बात कही जा रही है। वहीं क्षेत्रीय जनपद सदस्य विनय शर्मा (बीडीसी) ने ग्रामीणों और युवाओं को अपनी समस्याएं ग्राम सभा में रखने की सलाह देते हुए मामले को उचित मंच पर उठाने की बात कही।


पंचायत में विकास राशि, फिर सड़क के लिए ग्रामीणों को चंदा क्यों?


सोनपुर में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि पंचायत में विकास कार्यों के लिए शासन से राशि उपलब्ध होती है, तो ग्रामीणों को सड़क सुधारने के लिए आपसी चंदा जुटाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?


ग्रामीणों का सवाल है कि यदि पंचायत प्रशासन सक्रिय है, तो गांव की महत्वपूर्ण आवाजाही वाली सड़कें गड्ढों और कीचड़ से बदहाल क्यों हैं? ग्रामीणों के अनुसार, समस्या की जानकारी जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को दिए जाने के बावजूद यदि समाधान नहीं हुआ, तो आखिर जिम्मेदारी किसकी है?


युवाओं ने संभाली सड़क की कमान, मौके पर जिम्मेदारों की गैरमौजूदगी का आरोप


शनिवार को जब गांव के युवाओं ने स्वयं सड़क पर उतरकर गड्ढे भरने और मुरूम बिछाने का काम शुरू किया, तब ग्रामीणों के अनुसार सरपंच-सचिव मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने तक नहीं आए।


ग्रामीणों का कहना है कि जिस जनता ने गांव के विकास की उम्मीद में अपने जनप्रतिनिधियों को चुना, उसी जनता को अपनी मूलभूत सुविधा के लिए स्वयं चंदा जुटाकर सड़क सुधारने की नौबत आना चिंता का विषय है।


हालांकि, पंचायत में विकास राशि के दुरुपयोग या निजी हित में इस्तेमाल किए जाने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों की वास्तविकता संबंधित अभिलेखों और सक्षम स्तर पर जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


ग्रामीणों का श्रम बना पंचायत व्यवस्था पर सवाल


सोनपुर के युवाओं द्वारा अपने संसाधनों से सड़क के गड्ढे भरने और मुरूम बिछाने का प्रयास एक ओर ग्रामीणों की एकजुटता और जिम्मेदारी को दर्शाता है, तो दूसरी ओर यह पंचायत व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल भी खड़ा करता है।


ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए यदि उन्हें ही चंदा जुटाकर आगे आना पड़े, तो पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों की प्राथमिकताओं और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।


अब देखने वाली बात यह होगी कि ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब सरपंच-सचिव कब देते हैं और सोनपुर की बदहाल सड़कों को लेकर पंचायत स्तर पर क्या ठोस कदम उठाया जाता है।