भोपाल | मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर मचे घमासान और कांग्रेस के भीतर उभरे असंतोष की खबरों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मोर्चा संभाल लिया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी को लेकर जारी उठापटक पर विराम लगाते हुए दिग्विजय सिंह ने साफ किया कि कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तंज कसते हुए कहा कि सत्ता पक्ष इस भ्रम में न रहे कि वह किसी भी तरह की सेंधमारी या टूट-फूट करने में सफल हो पाएगी।


बीजेपी पाल रही है भ्रम, रणनीति होगी नाकाम: दिग्विजय सिंह

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से विशेष बातचीत के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा की कूटनीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विपक्षी खेमे में किसी भी प्रकार की गुटबाजी या कमजोरी से साफ इनकार किया।


गलतफहमी में है भाजपा:

"यदि भाजपा यह सोच रही है कि वह साम, दाम, दंड, भेद के जरिए कांग्रेस के विधायकों को तोड़ लेगी, तो वह बहुत बड़ी गलतफहमी का शिकार है। कांग्रेस पार्टी पूरी तरह एकजुट है और यह भ्रम पालने वाली भाजपा को इस बार मुंह की खानी पड़ेगी। हमारे सभी माननीय विधायक पूरी दृढ़ता और मजबूती के साथ पार्टी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में खड़े हैं। भाजपा की विधायकों को तोड़ने की कोई भी गुप्त रणनीति इस बार सफल नहीं होने वाली है।"

- दिग्विजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री


18 जून को अग्निपरीक्षा; नटराजन की साख दांव पर

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश से खाली हो रही राज्यसभा की 3 सीटों के लिए आगामी 18 जून को विधानसभा परिसर में मतदान होना है। सूबे में राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं, जिनमें से इन 3 सीटों पर विधायकों के मतों के आधार पर फैसला होगा।


बीजेपी के तीन मोहरे: भाजपा ने इस बार बेहद आक्रामक रणनीति अपनाते हुए तीन उम्मीदवारों—तरुण चुघ, राजनेश अग्रवाल और ओरछा के महेश केवट को मैदान में उतारा है।


कांग्रेस की एकलौती उम्मीद: वहीं कांग्रेस ने पूर्व लोकसभा सांसद और राहुल गांधी की बेहद करीबी मानी जाने वाली वरिष्ठ नेत्री मीनाक्षी नटराजन पर दांव खेला है। नटराजन संगठन स्तर पर बड़े पदों पर रह चुकी हैं।


असंतोष की खबरों के बीच एकजुटता दिखाने की चुनौती

वर्तमान राजनीतिक और गणितीय समीकरणों को देखें तो भाजपा को विधानसभा में स्पष्ट और भारी बढ़त हासिल है, जबकि कांग्रेस के पास अपनी एक सीट सुरक्षित रखने के लिए सीमित संख्या बल है। हालांकि, हाल ही में नटराजन के नाम की घोषणा के बाद भोपाल के कुछ स्थानीय वरिष्ठ नेताओं के इस्तीफे और विरोध के स्वर मुखर हुए थे, जिससे कांग्रेस के रणनीतिकारों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई थीं। ऐसे में चुनाव से ऐन पहले दिग्विजय सिंह जैसे कद्दावर नेता का मीनाक्षी नटराजन के पक्ष में खुलकर आना और विधायकों की एकजुटता का दावा करना, कांग्रेस के बिखराव को रोकने की एक बड़ी और महत्वपूर्ण कोशिश माना जा रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि 18 जून को होने वाले इस मतदान में ऊंट किस करवट बैठता है।