भोपाल। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी (CNG) की आसमान छूती कीमतों से परेशान राजधानी भोपाल के ऑटो चालकों का गुस्सा सोमवार को अनूठे ढंग से सड़क पर फूटा। ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों और ऑटो के किराए में लंबे समय से कोई संशोधन न होने के विरोध में सोमवार सुबह रायसेन रोड स्थित छावनी पठार में कई ऑटो चालक एकत्रित हुए। आर्थिक तंगी से जूझ रहे चालकों ने अपने हाथों में फटे हुए अंडरवियर लेकर सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक और अनोखा प्रदर्शन किया। ऑटो चालकों का कहना था कि बढ़ती महंगाई और ईंधन के दामों ने उनकी कमर तोड़ दी है, अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उनके पास नए अंडरवियर खरीदने तक के पैसे नहीं बचे हैं।


रायसेन रोड स्थित शनि मंदिर के पास आयोजित यह धरना प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा, लेकिन चालकों का आक्रोश और बेबसी साफ नजर आई। प्रदर्शन के दौरान ऑटो चालकों ने फटे अंडरवियर दिखाकर अपनी दयनीय आर्थिक स्थिति का प्रदर्शन किया। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि ऑटो की भारी-भरकम मासिक किस्त, ईंधन का खर्च, वाहन का रोज-रोज का रखरखाव और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते उनकी वित्तीय हालत पूरी तरह से खस्ता हो चुकी है। चालकों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि फाइनेंस कंपनियों की किस्तें भरते-भरते उनके कपड़े तक फट गए हैं, लेकिन इतनी भीषण महंगाई में अब परिवार का दो वक्त का गुजारा करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।


ऑटो संगठन के अध्यक्ष संजू अहिरवार ने कमाई का पूरा गणित समझाते हुए बताया कि यदि कोई चालक सीएनजी वाला ऑटो चलाता है, तो उसे दिनभर में कम से कम 500 रुपये की गैस भरवानी पड़ती है। इतनी महंगी गैस जलने के बाद पूरे दिन में बमुश्किल 1200 रुपये का धंधा (कमाई) हो पाता है। इस कुल रकम में से बचे 700 रुपये में दैनिक बचत और ऑटो की मासिक किस्त दोनों शामिल हैं। सब काट-पीटकर एक चालक के पास घर ले जाने के लिए 500 रुपये भी नहीं बच पा रहे हैं। यही वजह है कि ऑटो संगठन ने वर्तमान बाजार परिस्थितियों को देखते हुए सरकार से ऑटो किराए का नए सिरे से पुनर्निर्धारण करने की पुरजोर मांग की है ताकि चालक समय पर अपने वाहन की किस्त जमा कर सकें और अपने बच्चों का पालन-पोषण ठीक से कर सकें।


प्रदर्शन में शामिल अन्य ऑटो चालक पुष्पेंद्र अहिरवार, विशाल और राजेश ने भी अपनी चिंताएं साझा कीं। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई का सबसे घातक और सीधा असर रोज कमाने-खाने वाले मेहनतकश वर्ग पर पड़ रहा है। ईंधन की बढ़ी हुई दरों के कारण उनकी रोजाना की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा गैस और पेट्रोल पंपों पर ही खर्च हो जाता है। ऐसे में भविष्य के लिए बचत करना तो दूर, परिवार की राशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी उनके लिए पहाड़ जैसा काम हो गया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी जायज मांगों पर विचार करते हुए आधिकारिक किराया नहीं बढ़ाया, तो वे अपने इस आंदोलन को और उग्र करने के लिए बाध्य होंगे।