नई दिल्लीभारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने मंगलवार को ‘दूरसंचार इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026’ जारी किए, जो 1 जनवरी, 2027 से लागू होंगे।आधिकारिक बयान में कहा गया कि दूरसंचार में इंटरकनेक्शन का मतलब उन तकनीकी, परिचालन और वाणिज्यिक व्यवस्थाओं से है, जो दो या अधिक दूरसंचार नेटवर्क को आपस में जोड़ती हैं। इससे दूरसंचार ट्रैफिक का आदान-प्रदान संभव होता है और अलग-अलग सेवा प्रदाताओं के उपयोगकर्ता निर्बाध रूप से एक-दूसरे से संवाद कर पाते हैं।
इस संशोधन का उद्देश्य मौजूदा इंटरकनेक्शन नियामकीय ढांचे को आधुनिक नेटवर्क संरचनाओं के अनुरूप बनाना है। साथ ही, मौजूदा लॉन्ग डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (एलडीसीए) और शॉर्ट डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (एसडीसीए) स्तर के इंटरकनेक्शन से लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र (एलएसए) स्तर के इंटरकनेक्शन की ओर बदलाव को सुगम बनाना है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, ट्रैफिक को एलएसए स्तर के पॉइंट्स ऑफ इंटरकनेक्शन (पीओआई) पर स्थानांतरित करने से रूटिंग प्रक्रिया सरल होगी और सीमित नंबरिंग संसाधनों का अधिक कुशल प्रबंधन संभव होगा। इसके अलावा, इससे कम लेटेंसी और बेहतर सेवा विश्वसनीयता जैसे लाभ भी मिलेंगे।
मौजूदा एलडीसीए/एसडीसीए स्तर के पॉइंट्स ऑफ इंटरकनेक्शन (पीओआई) पर मिनट्स ऑफ यूसेज (एमओयू) के रूप में दर्ज ट्रैफिक को तीन वर्षों के भीतर चरणबद्ध तरीके से एलएसए स्तर के पीओआई पर स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद सभी ट्रैफिक का आदान-प्रदान एलएसए या सेवा क्षेत्र स्तर के पीओआई पर ही होगा।
संशोधन नियमों में सेवा प्रदाताओं द्वारा आईपी आधारित इंटरकनेक्शन स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इन नियमों के लागू होने के बाद स्थापित होने वाले सभी नए इंटरकनेक्शन आईपी आधारित होंगे।
ई1/टीडीएम आधारित इंटरकनेक्शन पर काम कर रहे सभी मौजूदा पीओआई को भी तीन वर्षों के भीतर चरणबद्ध तरीके से आईपी आधारित इंटरकनेक्शन में स्थानांतरित किया जाएगा। I आईपी आधारित इंटरकनेक्शन से बैंडविड्थ का अधिक कुशल उपयोग, कॉल की बेहतर गुणवत्ता और कॉल के शुरू से अंत तक बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित होगा।
आईपी आधारित इंटरकनेक्शन के मामले में किसी पीओआई की अधिकतम कॉल संभालने की क्षमता का निर्धारण एक साथ कितने सेशन संभाले जा सकते हैं और लिंक की बैंडविड्थ कितनी है, इसके आधार पर किया जाएगा। साथ ही, ट्राई के संबंधित नियमों के अनुसार निर्धारित सेवा गुणवत्ता को बनाए रखना होगा।
पीओआई को सरेंडर करने के लिए एक विशिष्ट नियामकीय ढांचा भी पेश किया गया है। इससे पहले नियमों में केवल पीओआई को ‘डिस्कनेक्ट’ करने का प्रावधान था, जिसका अर्थ पीओआई पर ट्रैफिक का आदान-प्रदान बंद करना था। यह कदम असाधारण परिस्थितियों में दोनों सेवा प्रदाताओं के बीच मतभेदों के कारण एक सेवा प्रदाता द्वारा दूसरे सेवा प्रदाता से जुड़ी वजहों के चलते उठाया जाता है।
वहीं, सरेंडर की प्रक्रिया का उद्देश्य किसी सेवा प्रदाता को अपनी परिचालन जरूरतों के अनुसार स्वेच्छा से पीओआई सरेंडर करने की अनुमति देना है। ऐसा ट्रैफिक में कमी, किसी क्षेत्र से सेवाएं वापस लेने या ट्रैफिक की रूटिंग में बदलाव जैसी परिस्थितियों में किया जा सकता है। इससे वित्तीय दक्षता में सुधार होगा।
मौजूदा बैंक गारंटी ढांचे को बरकरार रखा गया है। हालांकि, पुनर्मूल्यांकन के आधार पर जमा की जाने वाली बैंक गारंटी की वैधता और ऐसे पुनर्मूल्यांकन के बीच की अवधि को छह महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है। आईपी आधारित इंटरकनेक्शन सहित पीओआई के लिए बैंक गारंटी की अधिकतम सीमा निर्धारित करने की संशोधित पद्धति भी पेश की गई है।
इंटरकनेक्शन शुल्क या इंटरकनेक्शन उपयोग शुल्क के भुगतान में देरी से निपटने के लिए एक विशेष प्रावधान भी जोड़ा गया है। इसके तहत ब्याज दर सेवा प्रदाताओं की आपसी सहमति से तय होगी, लेकिन यह भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक वर्षीय मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) से दो प्रतिशत अधिक की अधिकतम सीमा से ऊपर नहीं हो सकती।
संशोधन नियमों में एलडीसीए/एसडीसीए स्तर के पीओआई से एलएसए स्तर के पीओआई पर ट्रैफिक स्थानांतरित करने और ई1/टीडीएम आधारित इंटरकनेक्शन से आईपी आधारित इंटरकनेक्शन में बदलाव की निगरानी के लिए रिपोर्टिंग संबंधी आवश्यकताएं भी निर्धारित की गई हैं।
नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए इनके प्रावधानों का उल्लंघन करने पर चरणबद्ध वित्तीय दंड का ढांचा भी निर्धारित किया गया है। इस संशोधन से नियामकीय ढांचे को लागू करने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और आनुपातिक बनेगी। साथ ही, नियमों के तहत आने वाले उल्लंघनों की प्रकृति और गंभीरता के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
नियामक ने कहा कि विलंबित भुगतान पर ब्याज, रिपोर्टिंग संबंधी आवश्यकताओं और वित्तीय दंड के प्रावधानों से इन नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

















