छतरपुर। छतरपुर जिले के बरकौहा गांव के एक किसान ने जिला प्रशासन की जनसुनवाई में पहुंचकर एसडीएम (राजस्व) छतरपुर और उनके कोर्ट रीडर पर भ्रष्टाचार और भारी घूसखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। आवेदक का कहना है कि एक लाख रुपये की रिश्वत न देने के कारण उसकी बंटवारे की अपील को मनमाने ढंग से खारिज कर दिया गया।


क्या है पूरा मामला?

ग्राम बरकौहा निवासी माखन यादव ने कलेक्टर को सौंपे गए शिकायती आवेदन में बताया कि उनके मामले में तहसीलदार छतरपुर द्वारा बिना कोई नोटिस दिए एकतरफा कार्रवाई करते हुए बंटवारा आदेश पारित कर दिया गया था। आरोप है कि हल्का पटवारी बरकौहा अभिनव शर्मा ने बिना मौके पर जाए ही फर्जी बंटवारा फर्द सूची तैयार कर ली, जिस पर आवेदक के हस्ताक्षर तक मौजूद नहीं हैं। पीड़ित किसान का दावा है कि जब इस मामले को लेकर एसडीएम न्यायालय में अपील की गई, तो वहां फैसला पक्ष में देने के एवज में 1 लाख रुपये की घूस की मांग की गई। एक गरीब किसान होने के कारण वह इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थ था, जिसके चलते उसकी अपील को मनमाने तरीके से निरस्त कर दिया गया।


एसडीएम न्यायालय और रीडर पर भ्रष्टाचार के गंभीर गंभीर आरोप

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि एसडीएम छतरपुर राजललन बागरी के न्यायालय में बिना लेन-देन के कोई भी आदेश या स्थगन (Stay) पारित नहीं किया जाता है। पैसों का यह पूरा लेनदेन कोर्ट के रीडर नितिन नामदेव के माध्यम से संचालित होता है। आवेदक ने आरोप लगाया है कि एसडीएम न्यायालय में हर मामले में 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है।


ग्रामीणों व पीड़ित की मांग

किसान माखन यादव ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि एसडीएम राजललन बागरी और रीडर नितिन नामदेव के कार्यकाल के दौरान हुए सभी फैसलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, भ्रष्टाचार में संलिप्त इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से छतरपुर तहसील से हटाए जाने की कड़ी मांग की गई है।