छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बक्सवाहा थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक पीड़ित परिवार ने बक्सवाहा थाना पुलिस पर चोरी की रिपोर्ट दर्ज न करने, अभद्र भाषा का प्रयोग करने और थाने से भगाने का गंभीर आरोप लगाया है। न्याय की गुहार लगाते हुए पीड़ित परिवार ने आज छतरपुर पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर लिखित आवेदन सौंपा और न्याय की मांग की है।


दिनदहाड़े सूने मकान को बनाया गया निशाना

बक्सवाहा के वार्ड नंबर 14 निवासी जयसिंह लोधी (पिता राम प्रसाद लोधी) के अनुसार, गत 30 सितंबर 2026 को उनका पूरा परिवार खेतों पर मजदूरी करने गया था। इसी दौरान दिन में करीब 11 से 5 बजे के बीच चोरों ने उनके सूने मकान का ताला तोड़कर घर में रखे लाखों रुपये के जेवरात और नकदी पर हाथ साफ कर दिया।


चोरों ने उड़ाए लाखों के जेवरात और नकदी

पीड़ित परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, घर से निम्नलिखित कीमती सामान चोरी हुआ है: 350 ग्राम चांदी का डवरा, चांदी की एक बड़ी चेन और 190 ग्राम चांदी की भारी पायल। 5 नग सोने की चूड़ियां (वजन 44 ग्राम), 10 ग्राम वजन का सोने का पेंडल (30 पुरिया), 35 ग्राम वजन का सोने का हार (10 पुरिया) और सोने की एक बड़ी झुमकी (वजन 30 ग्राम)। घर में रखे 3,500 रुपये नकद।

(चोरी गए कुल सोने-चांदी के जेवरातों की कीमत बाजार मूल्य के अनुसार लाखों रुपये में आंकी गई है।)


थानेदार पर गाली-गलौज करने और भगाने का आरोप

पीड़ित जयसिंह का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद जब वे रिपोर्ट दर्ज कराने बक्सवाहा थाने पहुंचे, तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें टरका दिया। जब वे दोबारा थाने पहुंचे, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों व थाना प्रभारी द्वारा उनके साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया गया तथा थाने से डांटकर भगा दिया गया।


आरोपियों द्वारा दी जा रही धमकियां

पीड़ित परिवार ने क्षेत्र के ही हरीराम लोधी और दीपक लोधी पर चोरी करने का सीधा संदेह और आरोप जताया है। पीड़ित का कहना है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और उन्हें लगातार डरा-धमका रहे हैं कि "तुम हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे, पुलिस भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ेगी।"


एसपी से सख्त कार्रवाई की गुहार

परेशान और दहशत में जी रहे पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि: तत्काल प्रभाव से चोरी की रिपोर्ट दर्ज की जाए। चोरी गए सोने-चांदी के जेवरातों की बरामदगी की जाए। पीड़ित परिवार को सुरक्षा मुहैया कराते हुए लापरवाह पुलिसकर्मियों और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।