टीकमगढ़/दमोह। दमोह जिले से टीकमगढ़ के बड़ौरा घाट गोदाम में भंडारण के लिए भेजा गया 3132 क्विंटल घटिया व अमानक स्तर का गेहूं जांच में फेल होने के बाद वापस लौटा दिया गया है। टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोतिय के सख्त निर्देश पर वेयरहाउस कॉरपोरेशन द्वारा यह बड़ी कार्रवाई की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विगत 19 मई से 2 जून 2026 के मध्य दमोह जिले से टीकमगढ़ के लिए लगभग 90,000 क्विंटल गेहूं स्टॉक करने हेतु भेजा गया था। बड़ौरा घाट स्थित गोदाम में जब इस खेप की बारीकी से जांच की गई, तो वेयरहाउस कॉरपोरेशन के जिला प्रबंधक मनोज पालिया को गेहूं की गुणवत्ता में भारी खामियां नजर आईं। उन्होंने तत्काल इसके नमूने (सैंपल) लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया, जिसके बाद कुल 6265 बोरियों में भरे 3132.50 क्विंटल खराब गेहूं को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए दमोह के लिए वापस रवाना कर दिया गया।
गुणवत्ता जांच की रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और चिंताजनक हैं। दमोह से सरकारी भंडारण के लिए भेजी गई इस खेप के गेहूं में भारी मात्रा में कीड़े और घुन लगे हुए थे। इसके साथ ही यह गेहूं मिट्टीयुक्त, पानी से प्रभावित होने के कारण सड़ा-गला और अत्यधिक बदबूदार था। इस मामले में बड़े स्तर पर धांधली और पुराने गेहूं की मिलावट किए जाने की प्रबल आशंका जताई जा रही है। अंदेशा है कि दमोह जिले में उपार्जन केंद्रों पर किसानों से नया गेहूं खरीदने के बाद, उसमें परिवहन और भंडारण के दौरान किसी स्तर पर पुराना व खराब हो चुका गेहूं मिला दिया गया। टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने इस गंभीर लापरवाही और गड़बड़ी के संबंध में दमोह कलेक्टर को पत्र लिखकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया है, ताकि मिलावटखोरों पर दमोह स्तर से कार्रवाई की जा सके।
उल्लेखनीय है कि टीकमगढ़ जिले में इस वर्ष किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कुल 44,410 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की गई है, जिसका सुरक्षित स्टॉक स्थानीय वेयरहाउसों और गोदामों में किया जा चुका है। चूंकि टीकमगढ़ में भंडारण की अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध थी, इसलिए नागरिक आपूर्ति निगम के माध्यम से दमोह जिले का गेहूं भी यहाँ भंडारित किया जा रहा था। जिला प्रबंधक मनोज पालिया ने बताया कि यदि समय रहते इस खराब गेहूं को न पकड़ा जाता, तो यह गोदाम में रखे टीकमगढ़ के अन्य अच्छे और उच्च गुणवत्ता वाले अनाज को भी संक्रमित कर पूरी तरह बर्बाद कर देता।
इसके साथ ही प्रबंधक मनोज पालिया ने वेयरहाउसिंग सिस्टम की एक और बड़ी लापरवाही को उजागर करते हुए बताया कि लगभग दो वर्ष पूर्व, वर्ष 2024 में जबलपुर और रीवा संभाग से करीब 18,320 क्विंटल अत्यंत खराब गुणवत्ता का चावल यहाँ भेजा गया था। उस समय भी प्रबंधन ने इसे अमानक मानकर वापस लेने के लिए तत्काल संबंधित विभागों को पत्र लिखा था, लेकिन 2 साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी उस कीड़े लगे बदबूदार चावल को वापस नहीं उठाया गया, जो आज भी गोदाम का एक बड़ा हिस्सा घेरे हुए सड़ रहा है। फिलहाल, समय रहते गेहूं की जांच होने से टीकमगढ़ का लाखों क्विंटल अच्छा अनाज खराब होने से बच गया है।

