भोपाल। मध्य प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत एक लाख से अधिक संविदा अधिकारी-कर्मचारियों के लिए सोमवार का दिन बड़ी सौगात लेकर आया। राज्य शासन के वित्त विभाग ने संविदा अधिकारी-कर्मचारियों के पारिश्रमिक (वेतन) में बढ़ोतरी के आधिकारिक आदेश सोमवार को जारी कर दिए हैं। नए आदेश के तहत संविदा कर्मियों के मानदेय में 4.46 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि लागू की गई है, जो कि 1 अप्रैल 2026 की स्थिति से प्रभावी मानी जाएगी। सरकार के इस फैसले से कर्मचारियों के मासिक वेतन में पद के अनुसार करीब 1,000 रुपये से लेकर 3,800 रुपये तक का सीधा इजाफा देखने को मिलेगा।


संविदा अधिकारी-कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए बताया कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में हुई बढ़ोतरी के आधार पर इस लाभ की पात्रता बनती थी, जिसके लिए संघ लगातार शासन से मांग कर रहा था। उन्होंने इस न्यायसंगत फैसले के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विशेष रूप से आभार भी व्यक्त किया है। गौरतलब है कि वित्त विभाग द्वारा जारी यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की 22 जुलाई 2023 की संविदा नीति के प्रावधानों के तहत जारी किया गया है। इस नीति के नियमों के अनुसार, महंगाई के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए हर साल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर संविदा कर्मियों के पारिश्रमिक में अनिवार्य रूप से वृद्धि की जाती है। इस बार तय की गई 4.46 प्रतिशत की दर पिछले वर्ष (2.94 प्रतिशत) की तुलना में काफी अधिक है, जिससे कर्मचारियों की जेब में अधिक पैसा आएगा।


इस वेतन वृद्धि से अकेले ऊर्जा विभाग और मध्य प्रदेश की विभिन्न बिजली कंपनियों में कार्यरत लगभग 4,500 संविदा अधिकारियों और लाइन स्टाफ को बड़ा वित्तीय लाभ मिलने जा रहा है। ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आने वाले पदों के हिसाब से देखें तो सहायक यंत्री (AE) के वेतन में सर्वाधिक 3,800 रुपये प्रति माह, जूनियर इंजीनियर (JE) के वेतन में 2,200 रुपये, जूनियर स्टेनो के मानदेय में 1,650 रुपये, टेस्टिंग असिस्टेंट के वेतन में 1,600 रुपये और मैदानी स्तर पर काम करने वाले लाइन असिस्टेंट के वेतन में 1,400 रुपये प्रति महीने की बढ़ोतरी तय हुई है। संघ के अनुसार, साल 2023 में लागू की गई संविदा नीति के बाद से अलग-अलग विभागों में समान पदों पर कार्यरत संविदा कर्मियों का वेतनमान एक समान (21,800 रुपये से लेकर 70,000 रुपये तक) निर्धारित कर दिया गया था, जिससे अब इस सीपीआई इंडेक्स का समान लाभ मिल पा रहा है।


हालांकि, इस बड़ी खुशखबरी के बीच तकनीकी पेंच यह भी है कि इस बढ़ी हुई दर का लाभ प्रदेश के केवल एक लाख कर्मचारियों को ही मिल सकेगा। वास्तव में मध्य प्रदेश के विभिन्न विभागों में करीब डेढ़ लाख संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं, लेकिन साल 2023 की संविदा नीति अब तक सभी विभागों में पूरी तरह क्रियान्वित (लागू) नहीं की जा सकी है। चूंकि यह वृद्धि 2023 की नीति के आधार पर ही जारी की गई है, इसलिए शेष 50 हजार कर्मचारी फिलहाल इस लाभ से वंचित रह जाएंगे। संविदा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने सरकार से पुरजोर मांग उठाई है कि जिन विभागों में अभी तक 2023 की संविदा नीति को ठंडे बस्ते में डाला गया है, वहां भी इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर बचे हुए सभी कर्मचारियों को भी इस महंगाई वृद्धि का पूर्ण लाभ दिया जाए।