कटनी। इस आखिरी बाधा के पार होते ही टनल का ब्रेकथ्रू हो जाएगा। बिना किसी लिफ्ट या पंप के सीधे बरगी बांध का पानी कटनी और विंध्य के खेतों की प्यास बुझाएगा। अधिकारियों के अनुसार अक्टूबर 2026 से जलापूर्ति विधिवत शुरू कर दी जाएगी।
चट्टानों को चीरकर किया इंजीनियरिंग का चमत्कार
साल 2011 में शुरू हुई इस परियोजना में जमीन से 30 मीटर नीचे खुदाई के लिए जर्मनी की विशालकाय टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल किया गया। निर्माण के दौरान ऊंचे भूजल स्तर, सिंकहोल और 56 बेहद कठोर चट्टानों जैसी भौगोलिक चुनौतियों ने इंजीनियरों की कड़ी परीक्षा ली। बाधाओं के कारण प्रोजेक्ट की लागत भी 799 करोड़ से बढ़कर लगभग 1,442 करोड़ रुपये पहुंच गई।
11.952 किलोमीटर लंबी टनल के साथ तैयार हुई संरचना
11.952 किलोमीटर लंबी मुख्य टनल के साथ 12 किमी लंबी ओपन नहर और कट-एंड-कवर संरचना भी तैयार की गई है। इस अंतिम बाधा के पार होते ही टनल का 'ब्रेकथ्रू' हो जाएगा, जिससे बिना किसी लिफ्ट या पंप के सीधे बरगी बांध का पानी कटनी और विंध्य के खेतों की प्यास बुझाएगा। यह परियोजना विंध्य क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने जा रही है।
2.45 लाख हेक्टेयर जमीन को मिलेगा नया जीवन
इस परियोजना से कटनी जिले की 21,823 हेक्टेयर कृषि भूमि सीधे सिंचित होगी। इसके अलावा पड़ोसी जिलों मैहर, सतना, जबलपुर, पन्ना और रीवा सहित कुल 1,450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को नया जीवन मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार शेष खुदाई को अगले छह सप्ताह में पूरा कर अक्टूबर 2026 से जलापूर्ति विधिवत शुरू कर दी जाएगी। विंध्य की धरा के लिए यह परियोजना किसी वरदान से कम नहीं है।




