नई दिल्ली। भारत में ऑनशोर विंड एनर्जी की क्षमता पहले के अनुमानों से काफी अधिक है। देश में 150 मीटर की हब ऊंचाई पर ऑनशोर विंड एनर्जी की क्षमता 1,209.7 गीगावाट और 200 मीटर की ऊंचाई पर 2,933.9 गीगावाट के करीब है। यह जानकारी एक थिंक-टैंक द्वारा सोमवार को दी गई।द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टीईआरआई) की ओर से सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, न्यूनतम 7.0 मीटर प्रति सेकंड की हवा की गति पर ऑफशोर विंड एनर्जी की क्षमता क्रमशः लगभग 220 गीगावाट और 277 गीगावाट आंकी गई है।
रिपोर्ट में उन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है, जहां संसाधनों की क्षमता का और सत्यापन करने की जरूरत है। साथ ही, विंड एनर्जी के विकास, सहायक बुनियादी ढांचे और उद्योग की क्षमताओं को मजबूत करने के उपाय भी बताए गए हैं।
भारत की स्थापित विंड एनर्जी क्षमता 30 सितंबर, 2026 तक 59.20 गीगावाट पहुंच गई थी। वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 6.05 गीगावाट की रिकॉर्ड क्षमता जुड़ने के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई।
रिपोर्ट में कहा गया, "जैसे-जैसे भारत में बिजली की मांग बढ़ रही है और नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार हो रहा है, विंड एनर्जी संसाधनों की बेहतर समझ से बिजली उत्पादन की योजना बनाने, नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद और बिजली पारेषण में निवेश से जुड़े फैसलों में मदद मिल सकती है।"
150 मीटर की ऊंचाई पर अनुमानित विंड एनर्जी क्षमता में राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक की हिस्सेदारी लगभग 61 प्रतिशत है। वहीं, महाराष्ट्र और तमिलनाडु को शामिल करने पर इन पांच राज्यों की संयुक्त हिस्सेदारी बढ़कर करीब 79 प्रतिशत हो जाती है।
बिजली क्षेत्र में बदलाव से जुड़ी इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2070 तक भारत की ग्रिड से जुड़ी बिजली की मांग मौजूदा स्तर से लगभग 11 गुना बढ़ सकती है।
रिपोर्ट के नेट जीरो लक्ष्य में वर्ष 2070 तक 891 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता का अनुमान लगाया गया है। यह प्रौद्योगिकी की लागत और बिजली प्रणाली से जुड़ी कुछ मान्यताओं के आधार पर संभावित विस्तार के बड़े पैमाने को दर्शाता है।
भारत जब अपने नेट जीरो लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने की योजना बना रहा है, ऐसे में पवन ऊर्जा संसाधनों का अधिक विस्तृत भौगोलिक आकलन यह समझने में मदद कर सकता है कि किन क्षेत्रों में वास्तव में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित की जा सकती है और इसके लिए पारेषण, ऊर्जा प्रणाली में लचीलेपन तथा विनिर्माण क्षेत्र में किस तरह के निवेश की जरूरत होगी।
रिपोर्ट में उद्योग में विंड एनर्जी के उपयोग के लिए छह प्रमुख रास्तों की पहचान की गई है। इनमें नए ऑनशोर विंड एनर्जी प्लांट का विकास, मौजूदा पवन ऊर्जा संयंत्रों का आधुनिकीकरण और उनकी क्षमता बढ़ाना, अधिक ऊंचाई पर पवन टर्बाइन स्थापित करना, पवन-सौर-बैटरी भंडारण का एकीकरण और औद्योगिक स्तर पर बिजली की खरीद, समुद्र में स्थिर आधार वाले पवन ऊर्जा प्लांट और तैरते हुए ऑफशोर पवन ऊर्जा प्लांट शामिल हैं।

















