फ्रांस। श्री मतंगेश्वर सेवा समिति, खजुराहो एवं दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर के तत्वावधान में 5 सितम्बर को दक्षिण फ्रांस के अरियाज राज्य के मीरपुआ नगर स्थित भक्ति योग केंद्र में शिक्षक दिवस एवं इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य श्री ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद का जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में विश्व के 126 देशों से आए कृष्ण भक्तों, संतों एवं श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा एवं सनातन धर्म के वैश्विक संदेश को आत्मसात किया।


कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्ज्वलन, गुरु वंदना एवं श्रील प्रभुपाद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। शिक्षक दिवस के अवसर पर उपस्थित गुरुजनों एवं शिक्षकों का अंगवस्त्र, पुष्पमाला एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। इस अवसर पर उनके शिक्षा, संस्कार एवं समाज निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान की सराहना की गई।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंडित सुधीर कृष्ण शर्मा ने कहा कि उनका जन्म एक शिक्षक परिवार में हुआ। उनकी माता श्रीमती पुष्पा शर्मा, जिन्हें स्नेहपूर्वक "बड़ी बहिन जी" के नाम से जाना जाता था, तथा उनके पिता स्वर्गीय श्री मथुरा प्रसाद शर्मा दोनों ही प्रतिष्ठित शिक्षक थे। उन्होंने कहा कि उन्हें बचपन से ही शिक्षा, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों की प्रेरणा अपने माता-पिता से मिली। उनका जन्म बुंदेलखंड में हुआ, जबकि उनके माता-पिता मूलतः ब्रजवासी थे। इसी कारण बुंदेलखंड और ब्रज दोनों क्षेत्रों के प्रति उनके मन में विशेष श्रद्धा और आत्मीयता है।

शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है, क्योंकि गुरु ही अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि वे संस्कार, नैतिकता, अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना का भी निर्माण करते हैं। एक आदर्श शिक्षक पीढ़ियों का भविष्य गढ़ता है और समाज को सही दिशा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करें तो एक शिक्षित, संस्कारित और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों के सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि उनके अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी पर्व है।


श्री ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के जीवन एवं उनके वैश्विक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कंस्यूशियसनेस ) के संस्थापक-आचार्य थे, जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और हरे कृष्ण महामंत्र का संदेश संपूर्ण विश्व तक पहुँचाया। उन्होंने बताया कि प्रभुपाद जी कहा करते थे—

"हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥"

इस महामंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने से मन शुद्ध होता है और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम जागृत होता है। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में विश्व के अनेक देशों का भ्रमण किया, सैकड़ों मंदिरों, आश्रमों एवं आध्यात्मिक केंद्रों की स्थापना का मार्गदर्शन दिया, हजारों शिष्यों को दीक्षा प्रदान की तथा लाखों लोगों को श्रीकृष्ण भक्ति से जोड़कर भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति का विश्वभर में प्रचार-प्रसार किया।


कार्यक्रम के दौरान एक बार पुनः पृथक बुंदेलखंड राज्य एवं ब्रज मंडल धाम के गठन की मांग प्रमुखता से उठाई गई, जिसका उपस्थित श्रद्धालुओं एवं विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों ने जोरदार समर्थन किया। उन्होने घोषणा की कि 18 जनवरी 2027 को खजुराहो स्थित श्री मतंगेश्वर महादेव मंदिर में वैदिक पूजन, पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं विशेष अनुष्ठान के पश्चात ब्रज मंडल धाम यात्रा का शुभारंभ किया जाएगा। उन्होंने देश-विदेश के श्रद्धालुओं से इस ऐतिहासिक यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान किया।


कार्यक्रम में भोजन प्रसाद की व्यवस्था इंजी. सुरेंद्र गुप्ता द्वारा की गई। आयोजन को सफल बनाने में राधारानी दासी, स्वामी मूर्ति जी एवं नटरानी दासी की विशेष भूमिका रही।


इस अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज, पंडित श्री देव प्रभाकर शास्त्री जी (दादा जी), पंडित श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी (बागेश्वर धाम) के अनुयायियों सहित अर्हम ध्यान योग, ब्रह्माकुमारी, ओशो तथा विभिन्न आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के शिष्य मंडलों ने सहभागिता कर विश्व शांति, सनातन संस्कृति एवं मानव कल्याण का संदेश दिया।


कार्यक्रम का समापन सामूहिक हरिनाम संकीर्तन, गुरु वंदना, प्रसाद वितरण एवं विश्व शांति की प्रार्थना के साथ हुआ। यह आयोजन भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षक सम्मान और श्रीकृष्ण भक्ति के वैश्विक विस्तार का एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा।