चंडीगढ़। भाजपा नेता सुनील जाखड़ ने पंजाब के राज्यपाल को पत्र लिखकर राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू करने की मांग की है। राज्यपाल को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि पंजाब की बिगड़ती कानून-व्यवस्था की ओर ध्यान दिलाना चाहते हैं, जिसे भगवंत मान सरकार ने अब खुद स्वीकार कर लिया है।
सुनील जाखड़ ने कहा कि सरकार ने खराब कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए एक मैराथन कार्यक्रम तक को अनुमति देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने राज्यपाल से तत्काल हस्तक्षेप और चुनाव आयोग को राज्य में जल्द आचार संहिता लागू करने की सिफारिश करने का अनुरोध किया है, ताकि आगामी विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से हो सकें और लोग बिना डर के वोट डाल सकें।
सुनील जाखड़ ने पत्र में लिखा कि अबोहर में पिछले कई साल से हर साल नशा विरोधी मैराथन का आयोजन किया जाता है। हजारों युवा नशे के खिलाफ इस अभियान में हिस्सा लेते हैं। लेकिन इस साल सरकार ने लिखित में मैराथन की अनुमति देने से इनकार कर दिया और कहा कि मौजूदा माहौल ठीक नहीं है और खराब कानून-व्यवस्था के कारण कार्यक्रम नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि भले ही वह इस सरकार और उसकी नीतियों के विरोधी हैं, लेकिन सरकार द्वारा पहली बार इस कड़वे सच को स्वीकार करने से वह सहमत हैं। वाकई राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। कोई भी सुरक्षित नहीं है। जहां नशा युवाओं की जान ले रहा है, वहीं ड्रग माफिया का आतंक इतना बढ़ गया है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को गोलियों से चुप कराया जा रहा है।
सुनील जाखड़ ने लिखा कि श्री अमृतसर साहिब से लेकर तरनतारन, खेमकरण, गुरदासपुर, हरगोबिंदपुर, मानसा, अबोहर, संगरूर और लुधियाना तक, राज्य के हर जिले और शहर में खुलेआम हत्याएं हो रही हैं। सरकार की भूमिका इतनी निंदनीय हो गई है कि पुलिस नशे से मरे बच्चों के शवों को भी परिवारों से जबरदस्ती छीन रही है। जो भी सरकार के सामने नशे के खिलाफ विरोध करता है उसे या तो पुलिस दमन झेलना पड़ता है या आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब अचानक नहीं हुआ। इसके पीछे आम आदमी पार्टी सरकार की नीति है, जिसका खुलासा खुद पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने किया था, जब उन्होंने कहा था कि वे चुनाव जीतने के लिए साम, दाम, दंड, भेद, लड़ाई-झगड़ा, झूठ-सच कुछ भी करेंगे। इसी नीति के तहत सरकार ने चहेते अधिकारियों को नियुक्त किया है, जबकि गुंडों और गैंगस्टरों को पार्टी में शामिल किया जा रहा है या उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय खुद भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है।
सुनील जाखड़ ने पत्र में लिखा कि जेलों से नशा और हथियारों की तस्करी चल रही है, तस्करों और हत्यारों को पैरोल पर रिहा कर विदेश भगाया जा रहा है। महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामलों को दबाने के लिए करोड़ों के लेनदेन के मामले सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री के परिवार का नाम भी 5 करोड़ के एक ऐसे मामले में आया है, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार जांच नहीं करा रही।
उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना संभव नहीं होगा। इसलिए उन्होंने मांग की है कि चुनाव आयोग के पर्यवेक्षण में ईमानदार अधिकारियों की नियुक्ति हो सके और चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए जा सकें।













