नई दिल्ली। चेन्नई में मिड-साइज ऑफिस स्पेस (50,000–1,00,000 वर्ग फुट) की लीजिंग गतिविधि 2026 की पहली छमाही में लगभग दोगुनी होकर 12 लाख वर्ग फुट पर पहुंच गई, जो कि 2025 की पहली छमाही में 6 लाख वर्ग फुट थी।नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इसी अवधि में मिड-साइज ऑफिस ट्रांजैक्शंस की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से बढ़कर 32 प्रतिशत हो गई। इसका दिखाता है कि चेन्नई में हर तीन ऑफिस डील में से लगभग एक डील मिड-साइज ऑफिस स्पेस की रही।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 की पहली छमाही में बड़े ऑफिस सौदे (1,00,000 वर्ग फुट से अधिक) कुल लीजिंग गतिविधि का 60 प्रतिशत हिस्सा थे, लेकिन 2026 की पहली छमाही में बाजार अधिक संतुलित हो गया। इस दौरान छोटे ऑफिस ट्रांजैक्शंस का योगदान 36 प्रतिशत, मिड-साइज ऑफिस का 32 प्रतिशत और बड़े ऑफिस का 31 प्रतिशत रहा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बदलता हुआ स्वरूप दर्शाता है कि अब विभिन्न आकार के ऑफिस स्पेस में लीजिंग गतिविधि अधिक संतुलित और विविध हो गई है।
नाइट फ्रैंक इंडिया में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर-ऑक्यूपायर स्ट्रैटेजी एंड सॉल्यूशंस तथा हेड ऑफ डेटा सेंटर बिजनेस (इंडिया) जोसेफ थिलक ने कहा, "चेन्नई का ऑफिस बाजार अब अधिक विविध लीजिंग इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है, जहां मिड-साइज ऑफिस लेने वाली कंपनियां मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जैसे-जैसे कंपनियां चरणबद्ध विस्तार की रणनीति अपना रही हैं और परिचालन में अधिक लचीलापन चाहती हैं, हमें उम्मीद है कि मिड-साइज ऑफिस सेगमेंट में मांग मजबूत बनी रहेगी।"
उन्होंने कहा कि चेन्नई मध्यम अवधि में संतुलित ऑफिस मार्केट ग्रोथ बनाए रखने की मजबूत स्थिति में है।
इस बीच, अहमदाबाद में भी 50,000–1,00,000 वर्ग फुट श्रेणी के ऑफिस स्पेस की लीजिंग गतिविधि 2026 की पहली छमाही के दौरान मजबूती से बढ़ी। इस श्रेणी में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम सालाना आधार पर 121 प्रतिशत बढ़कर 2.7 लाख वर्ग फुट हो गया, जो 2025 की पहली छमाही में 1.2 लाख वर्ग फुट था।
रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद में मिड-साइज ऑफिस ट्रांजैक्शंस की हिस्सेदारी भी 15 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गई। यह रुझान दर्शाता है कि कंपनियां परिचालन में लचीलापन बनाए रखते हुए विस्तार योग्य ऑफिस स्पेस को अधिक प्राथमिकता दे रही हैं।




