सतना, अंबिका केशरी। जिला अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। सड़क दुर्घटना में पैर टूटने के बाद इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे संतोष अग्रवाल को वार्ड तक जाने के लिए न तो स्ट्रेचर मिला और न ही कोई सहायक कर्मचारी। मजबूर होकर मरीज ने ई-रिक्शा चालक से वार्ड तक पहुंचाने की गुजारिश की।
मरीज की परेशानी देखते हुए ई-रिक्शा चालक ने मानवता दिखाते हुए वाहन को सीधे हड्डी वार्ड के सामने तक पहुंचा दिया। अस्पताल परिसर के अंदर ई-रिक्शा पहुंचते ही सुरक्षा गार्ड सक्रिय हो गए और चालक को पकड़कर पुलिस चौकी ले गए, जहां उससे पूछताछ की गई। हालांकि पूरी स्थिति सामने आने के बाद मामला सुरक्षा में सेंध से अधिक अस्पताल की अव्यवस्था से जुड़ा नजर आया।
संतोष अग्रवाल के मुताबिक सड़क दुर्घटना में उनका पैर टूट गया है और उनका ऑपरेशन होना है। शरीर में खून की कमी होने के कारण फिलहाल उन्हें वार्ड क्रमांक-4 में भर्ती किया जाना था। वह अस्पताल में अकेले थे और मुख्य प्रवेश द्वार पर वार्ड तक पहुंचाने के लिए स्ट्रेचर या कर्मचारी उपलब्ध नहीं था। इसी कारण उन्होंने ई-रिक्शा चालक से मदद मांगी।
घटना ने जिला अस्पताल में मरीजों के लिए स्ट्रेचर और सहायक कर्मचारियों की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रवेश द्वार पर समय रहते मरीज को स्ट्रेचर मिल जाता तो ई-रिक्शा चालक को अस्पताल के भीतर वाहन ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
बताया गया है कि जिला अस्पताल में इस तरह का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 30 मई को भी स्ट्रेचर नहीं मिलने के कारण एक युवक अपने मरीज को लेने बाइक से अस्पताल की पहली मंजिल स्थित वार्ड तक पहुंच गया था। उस समय मरीज को रीवा रेफर किया जाना था। तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए युवक को समझाइश देकर जाने दिया गया था।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था के साथ मरीजों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं पर भी सवाल उठा रही हैं। अस्पताल प्रबंधन के सामने अब चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि गंभीर और असहाय मरीजों को वार्ड तक पहुंचने के लिए समय पर स्ट्रेचर और कर्मचारी उपलब्ध हों, ताकि भविष्य में किसी मरीज या मददगार को मजबूरी में नियमों का उल्लंघन न करना पड़े।




