संयुक्त राष्ट्र। सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जोखिमों को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अंतरराष्ट्रीय समझौते पर बातचीत शुरू करने की अपील की है।

उन्होंने चेतावनी दी कि सरकारें जहां एआई से आर्थिक फायदे लेना चाहती हैं, वहीं ऑटोमेटिक सिस्टम से गंभीर खतरे भी पैदा हो रहे हैं।

एशिया सोसायटी में एक चर्चा के दौरान विवियन बालाकृष्णन ने कहा कि एआई से जुड़े जोखिम तीन बड़े क्षेत्रों में हैं। पहला, एआई एजेंट्स पर नियंत्रण खोना, दूसरा, गलत इरादे वाले लोगों द्वारा इसका खतरनाक इस्तेमाल और तीसरा, जनता के भरोसे और राजनीतिक बहस को नुकसान पहुंचना।

उन्होंने कहा, "मैं निराशावादी नहीं हूं, लेकिन मुझे लगता है कि जोखिम बहुत ज्यादा हैं।" सिंगापुर के विदेश मंत्री ने सवाल उठाया कि क्या एआई बनाने वाले लोग भी इस पर पूरा नियंत्रण का दावा कर सकते हैं। कोई भी अगर आपको कहे, चाहे वह एआई का निर्माता ही क्यों न हो, कि उसके पास किल स्विच पर पूरा नियंत्रण है, तो वह आपको धोखा दे रहा है। नियंत्रण खोना एक बहुत ही वास्तविक खतरा है।

उन्होंने चेतावनी दी कि एआई से गलत तत्वों के लिए जैविक या रासायनिक हथियार बनाना आसान हो सकता है। एक और खतरा यह है कि अब भरोसेमंद लगने वाली तस्वीरें और वीडियो आसानी से बनाए जा सकते हैं, जिससे लोगों को यह समझना मुश्किल हो जाता है कि जो वे देख-सुन रहे हैं, वह सच है या नहीं।

हालांकि, विवियन बालाकृष्णन ने कहा कि समाधान यह है कि तकनीक को आगे बढ़ने दिया जाए, लेकिन साथ ही सुरक्षा उपाय भी बनाए जाएं।

उन्होंने एआई के विकास की तुलना तेज कार चलाने से की और कहा कि ताकतवर इंजन के लिए ब्रेक, सीट बेल्ट और सड़क के नियमों की जरूरत होती है।

विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र एक ऐसा मंच है जहां अलग-अलग आकार और तकनीकी क्षमता वाले देश एक साथ भाग ले सकते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या हमें एआई पर यूएन समझौते की जरूरत है?

उन्होंने समुद्र के कानून और जलवायु परिवर्तन पर हुए अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उदाहरण दिया और कहा कि ये समझौते मुश्किल थे, लेकिन जरूरी थे।

विवियन बालाकृष्णन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एआई पर चर्चा का स्वागत किया, हालांकि उन्होंने माना कि इस बातचीत से निकलने वाले सुरक्षा नियम अभी कमजोर हैं।

उन्होंने अमेरिका और चीन को एक ही तकनीकी बुनियाद पर काम करने वाले प्रतिस्पर्धी बताया और अनुमान लगाया कि फ्रंटियर एआई मॉडल में अमेरिका को शायद छह महीने की बढ़त हासिल है, लेकिन चीन भी इस नए तकनीकी युग के अवसरों को हासिल करने के लिए दृढ़ है। उनका रिश्ता दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए गहरे परिणाम वाला होगा।

सिंगापुर और उसके पड़ोसियों के लिए प्राथमिकता तकनीक तक पहुंच, सप्लाई चेन को खुला रखना और एआई को अर्थव्यवस्था में इस्तेमाल करना है। विवियन बालाकृष्णन ने कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया फ्रंटियर मॉडल बनाने में दोनों महाशक्तियों से मुकाबला नहीं कर पाएगा, लेकिन सार्वजनिक सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में एआई को लागू करने में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकता है। इसके लिए शिक्षा में बदलाव और काम के बदलते स्वरूप के साथ लगातार ट्रेनिंग जरूरी होगी।