भोपाल। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) द्वारा आयोजित की जा रही वनरक्षक, क्षेत्ररक्षक, जेल प्रहरी और सहायक जेल अधीक्षक भर्ती परीक्षा में रविवार को एक बड़ा तकनीकी व्यवधान सामने आया है। परीक्षा की दूसरी पाली के दौरान अचानक सर्वर फेल हो जाने के कारण मंडल को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इस अव्यवस्था और तकनीकी खामी के कारण प्रदेश भर के परीक्षा केंद्रों पर हजारों अभ्यर्थियों को भारी परेशानी और घोर निराशा का सामना करना पड़ा। इस मुद्दे को लेकर सूबे की सियासत गरमा गई है और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए तीखा हमला बोला है।


यह पूरा घटनाक्रम रविवार को दोपहर ढाई बजे से साढ़े चार बजे तक निर्धारित दूसरी पाली की परीक्षा के दौरान घटित हुआ। परीक्षा शुरू होते ही अचानक एमपीईएसबी का सर्वर पूरी तरह ठप हो गया, जिससे कंप्यूटर स्क्रीन फ्रीज हो गईं। प्रदेश के विभिन्न केंद्रों पर अभ्यर्थी घंटों तक सर्वर ठीक होने का इंतजार करते रहे, लेकिन अंततः तकनीकी खराबी दूर न होने पर परीक्षा रद्द करने की आधिकारिक घोषणा कर दी गई। इस सूचना के बाद कई परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। परीक्षा की तैयारी में दिन-रात एक करने वाले कई छात्र केंद्रों के बाहर भावुक होकर रो पड़े। उल्लेखनीय है कि यह भर्ती परीक्षा 4 जून से 19 जून 2026 तक निर्धारित थी। हालांकि, मंडल ने बाद में त्वरित सूचना जारी कर प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए आगामी 20 जून की नई तारीख घोषित की है, लेकिन परीक्षार्थियों का साफ कहना है कि बार-बार होने वाली इन तकनीकी खामियों और अनिश्चितताओं के कारण उनकी मानसिक स्थिति और तैयारी पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है।


इस बड़ी प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कुख्यात व्यापमं घोटाले के इतने वर्षों बाद भी राज्य की सरकारी भर्ती परीक्षाएं विवादों, भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं के दलदल से बाहर नहीं निकल पाई हैं। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि मध्य प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ बार-बार होने वाला यह क्रूर खिलवाड़ आखिर कब जाकर रुकेगा। सिंघार ने कहा कि यदि सरकार और उसका परीक्षा मंडल इतनी महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी, व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सक्षम तरीके से संचालित करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है, तो देश और प्रदेश के युवाओं का इस पूरी चयन व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रह सकता है। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा कि मध्य प्रदेश के पढ़े-लिखे युवाओं को अब सरकार के खोखले बहानों की नहीं, बल्कि एक समयबद्ध, साफ-सुथरी और विश्वसनीय भर्ती प्रक्रिया की सख्त जरूरत है।


नेता प्रतिपक्ष ने राज्य की इस अव्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षाओं में सामने आ रही बड़ी अनियमितताओं से जोड़ते हुए मामले को और गरमा दिया है। उन्होंने देश भर के युवाओं के भविष्य से जुड़े इन मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की। अपने बयान में सिंघार ने हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसमें राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाने वाली अन्य परीक्षाओं में सामने आए कथित पेपर लीक, फर्जीवाड़े और परीक्षा प्रबंधन के गंभीर मुद्दों पर केंद्र सरकार से श्वेत पत्र (वाइट पेपर) जारी करने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि चाहे केंद्र की एनटीए हो या मध्य प्रदेश का चयन मंडल, दोनों ही युवाओं का भरोसा जीतने में पूरी तरह असफल रहे हैं और कांग्रेस युवाओं के हक की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक मजबूती से लड़ेगी।