छतरपुर, शिवम सोनी। छतरपुर के विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव की अदालत ने रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी ब्लॉक कोऑर्डिनेटर नीलम तिवारी को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने आरोपी नीलम तिवारी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 7 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि अदा न करने की स्थिति में आरोपी को 3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की ओर से महिला होने और लंबे समय से विचारण झेलने का हवाला देते हुए परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देने या न्यूनतम दंड देने का तर्क दिया गया था। हालांकि, अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने भ्रष्टाचार के अपराध की गंभीरता को देखते हुए कड़े दंड की मांग की। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत न्यूनतम दंड का प्रावधान है और अपराध की प्रकृति व परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को परिवीक्षा का लाभ दिया जाना उचित नहीं है।
अभियोजन अधिकारी प्रवेश अहिरवार ने बताया कि अदालत ने निर्णय सुनाते हुए प्रकरण में जब्त की गई 5,500 रुपये की राशि को फरियादी जितेंद्र सिंह उम्र 30 वर्ष, निवासी ग्राम सरानी, थाना कोतवाली को अपील अवधि समाप्त होने के बाद लौटाने का आदेश दिया है। वहीं, ट्रैप की कार्रवाई के दौरान साक्ष्य के रूप में जब्त घोल, फिनाफ्थलीन पाउडर और सोडियम कार्बोनेट की सीलबंद पुडिय़ों को निर्धारित समयावधि के बाद नियमानुसार नष्ट करने के निर्देश दिए हैं। विशेष न्यायालय ने निर्णय की प्रति विशेष लोक अभियोजक के माध्यम से जिला दंडाधिकारी छतरपुर को प्रेषित करने और आरोपी को नि:शुल्क प्रति उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।




