सोल। दक्षिण कोरिया की एक अपीलीय अदालत ने बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू के विद्रोह से जुड़े मुकदमे में झूठी गवाही देने के आरोप से बरी कर दिया।
सोल हाईकोर्ट ने कहा कि नवंबर में हुई सुनवाई के दौरान यून ने जब यह कहा था कि 3 दिसंबर 2024 को मार्शल लॉ लागू करने से पहले उनका कैबिनेट बैठक बुलाने का इरादा था, तो यह नहीं लगता कि उन्होंने कोई झूठा बयान दिया था।
यह फैसला मई में निचली अदालत की ओर से दिए गए बरी करने के फैसले के अनुरूप है।
अपीलीय अदालत ने कहा, "यह मानना मुश्किल है कि आरोपी, अपने पद और अनुभव को देखते हुए, यह नहीं जानते थे कि मार्शल लॉ की घोषणा से पहले कैबिनेट बैठक में इस पर चर्चा होना जरूरी है। वास्तव में, ऐसा लगता है कि उन्होंने मार्शल लॉ लागू करने के लिए कम से कम आवश्यक कानूनी शर्तों को पूरा करने की कोशिश की थी।"
विशेष अभियोजक चो यून-सुक की टीम ने पूर्व राष्ट्रपति पर झूठी गवाही देने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया था। टीम का कहना था कि यून ने शुरुआत में केवल छह कैबिनेट मंत्रियों को अपने कार्यालय बुलाया था, लेकिन बाद में हान डक-सू के सुझाव पर उन्होंने बैठक के लिए जरूरी संख्या पूरी करने के उद्देश्य से और मंत्रियों को बुलाने का फैसला किया।
अभियोजन पक्ष ने यून पर 10 मिलियन वॉन (करीब 7,332 अमेरिकी डॉलर) का जुर्माना लगाने की मांग की थी।
हालांकि, अपीलीय अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यून, हान डक-सू के सुझाव से अलग, खुद भी अतिरिक्त कैबिनेट सदस्यों को बैठक में बुलाने का इरादा रखते थे।
पूर्व राष्ट्रपति यून सुक इस समय जेल में हैं और उनके खिलाफ कई मुकदमे चल रहे हैं। ये मामले उनके असफल मार्शल लॉ प्रयास और बाद में पद से हटाए जाने से जुड़े हैं।
फरवरी में एक जिला अदालत ने मार्शल लॉ को थोड़े समय के लिए लागू करके विद्रोह का नेतृत्व करने के मामले में यून को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई फिलहाल जारी है।




