मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने गुरुवार को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 के दौरान भारत के पहले टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड पायलट का शुभारंभ किया, जिसे देश के वित्तीय बाजारों में ब्लॉकचेन तकनीक और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) के उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत टोकनाइज्ड सिक्योरिटीज और एसेट सेटलमेंट में ब्लॉकचेन तकनीक तथा डिजिटल रुपए (सीबीडीसी) का उपयोग किया जाएगा। शुरुआती चरण में यह व्यवस्था कॉरपोरेट बॉन्ड पर केंद्रित रहेगी, लेकिन भविष्य में इसका विस्तार अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों जैसे शेयर, म्यूचुअल फंड यूनिट्स और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट तक भी किया जा सकता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ग्लोबल फिनटेक फेस्ट अब केवल एक उद्योग सम्मेलन नहीं रह गया है, बल्कि यह ऐसा मंच बन चुका है जहां वित्तीय क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्ष भविष्य की वित्तीय व्यवस्था को आकार देने वाले विचारों पर चर्चा करते हैं।
उन्होंने भारत में डिजिटल वित्तीय परिवर्तन की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में अब 57 करोड़ प्रधानमंत्री जन धन योजना खाते, 25 करोड़ सूक्ष्म बीमा पॉलिसियां और अटल पेंशन योजना के तहत 9 करोड़ लाभार्थी हैं। वहीं, यूपीआई पर लगभग 80 करोड़ लेनदेन दर्ज किए जा रहे हैं।
मल्होत्रा ने कहा कि इन उपलब्धियों की सबसे बड़ी विशेषता केवल उनका पैमाना नहीं है, बल्कि यह है कि डिजिटल वित्त अब लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सहयोग से देश में व्यापक वित्तीय समावेशन संभव हुआ है।
उन्होंने कहा कि अब अगला लक्ष्य वित्तीय सेवाओं को हर व्यक्ति तक, हर समय और हर स्थान पर उपलब्ध कराना होना चाहिए। उनके अनुसार, पारंपरिक वित्तीय संस्थानों को महिलाओं, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और किसानों तक छोटे ऋण पहुंचाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में फिनटेक कंपनियां तकनीक के माध्यम से इन कमियों को दूर कर सकती हैं और वित्तीय समावेशन को और मजबूत बना सकती हैं।
आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि फिनटेक क्षेत्र में नवाचार जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण विश्वास भी है। उन्होंने कहा कि विश्वास बनाने में वर्षों लगते हैं, लेकिन यह बहुत कम समय में टूट सकता है। इसलिए फिनटेक कंपनियों को पारदर्शिता, समावेशन और साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिमों का गंभीरता से समाधान करना होगा।
मल्होत्रा ने कहा, "यदि कोई वित्तीय प्रणाली प्रकाश की गति से चलती है लेकिन लोगों का भरोसा हासिल नहीं कर पाती, तो उसे व्यापक स्वीकार्यता नहीं मिलेगी।" उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ विश्वास और सुरक्षा का निर्माण भी समान रूप से आवश्यक है।




