नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक की रैली को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने के लिए जनता के बीच विश्वसनीयता कायम नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए अब एसआईआर का बहाना बनाकर देश में अराजकता और आतंक का माहौल बनाना चाहते हैं।

गिरिराज सिंह ने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी लगातार चुनाव जीत रहे हैं। वहीं, राहुल गांधी जिन राज्यों में चार-चार दशक पहले हारे थे, वहां आज भी कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पा रहा है। राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शनों का व्यापारी वर्ग और आम जनता दोनों विरोध कर रहे हैं, इसके बावजूद वे अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति से कांग्रेस अगले तीन दशक तक सत्ता में नहीं आ पाएगी। सत्ता में वापसी का रास्ता जनता के बीच जाकर, उनकी समस्याएं सुनने से निकलता है, अर्बन नक्सल जैसी गतिविधियों से नहीं।

गिरिराज सिंह ने कहा कि राहुल गांधी अपनी खोई हुई जमीन वापस नहीं ले पा रहे हैं और जहां वे हार चुके हैं, वहां नई जमीन मिलने की कोई उम्मीद भी नहीं दिख रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जहां कांग्रेस जीत जाती है वहां चुप्पी साध ली जाती है और जहां हार जाती है, वहां एसआईआर जैसे मुद्दे उठाए जाते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि 1 नवंबर को होने वाली रैली की तारीख को लेकर विवाद हो रहा है क्योंकि उसी दिन 1984 के सिख दंगों की बरसी भी है, तो इस पर गिरिराज सिंह ने कहा कि राहुल गांधी को सिख दंगों की कोई चिंता नहीं है। ऐसी तारीख का चयन करना सिख समुदाय के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है और यह तारीख उनके लिए ही काल साबित होगी।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के उस विवादित बयान पर जिसमें उन्होंने कहा था कि 'पाकिस्तान कश्मीरियों की रक्षा कर रहा है, वरना भारत के इरादे ठीक नहीं हैं', गिरिराज सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला कभी भी कश्मीरी जनता के हिमायती नहीं रहे हैं। वे हमेशा सत्ता और पाकिस्तान के हिमायती रहे हैं। अगर कश्मीर में पाकिस्तान की भूमिका होती तो कश्मीरी कभी सुरक्षित नहीं रहते।

जेएनयू में लगे विवादित नारों और दीवारों पर लिखी गई बातों को लेकर भी केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि ये वही टुकड़े-टुकड़े गैंग के लोग हैं जिन्होंने कुछ साल पहले जेएनयू परिसर में 'अफजल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं' जैसे नारे लगाए थे। उस आंदोलन में केवल खालिद अंसारी जैसे लोग ही नहीं थे, बल्कि राहुल गांधी खुद भी वहां गए थे।

उन्होंने कहा कि आज फिर वही लोग 'फ्री खालिद अंसारी' और 'फ्री कश्मीर' जैसे नारे लगा रहे हैं। कश्मीर तो पहले से ही स्वतंत्र है, जबकि दूसरी तरफ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में लोगों को भोजन तक नहीं मिल रहा है। ये लोग देश में आतंक फैलाना चाहते हैं और इनके आका विदेशों में बैठे हैं जबकि देश के अंदर इसका ठेका राहुल गांधी ने ले रखा है।

गिरिराज सिंह ने अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव सहित अन्य विपक्षी नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 'फ्री खालिद अंसारी' और 'फ्री कश्मीर' जैसे नारों पर उनकी चुप्पी सवाल खड़े करती है। उन्होंने पूछा कि आखिर इस पर उनकी जुबान क्यों नहीं खुल रही है? क्या राहुल गांधी भी इनके साथ हैं? अगर वे इसका जवाब नहीं देते हैं तो यही समझा जाएगा कि फारूक अब्दुल्ला की जुबान ही राहुल गांधी की जुबान है और ये सारे बयान उन्हीं के इशारे पर दिलवाए जा रहे हैं।