नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 6 जून के प्रदर्शन के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई निर्धारित समय के अनुसार ही की जाएगी।

सेव इंडिया फाउंडेशन नामक संगठन की ओर से दायर याचिका में मांग की गई कि प्रस्तावित आंदोलन के दौरान प्रदर्शन और धरनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के तय दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। याचिकाकर्ता ने अदालत से इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की। हालांकि कोर्ट ने याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले याचिकाकर्ता संगठन सेव इंडिया फाउंडेशन के वकील विकास शर्मा ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को संविधान के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन बिना अनुमति के बड़ी संख्या में लोगों को एकत्रित करने की घोषणा गंभीर चिंता का विषय है।

विकास शर्मा ने कहा, ''किसी को भी शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन यदि कोई यह घोषणा करता है कि पांच लाख या दस लाख लोग किसी स्थान पर एकत्र होंगे और इसके लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है, खासकर राष्ट्रीय राजधानी में, तो यह गंभीर मामला बन जाता है।''

उन्होंने कहा कि इसी वजह से अदालत का दरवाजा खटखटाना जरूरी हो गया। उनके अनुसार, अब तक प्रदर्शन के आयोजकों की ओर से न तो किसी प्रकार की व्यवस्था की जानकारी दी गई है और न ही यह बताया गया है कि इतने बड़े प्रदर्शन को शांतिपूर्ण ढंग से कैसे संचालित किया जाएगा। सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में प्रदर्शन से संबंधित सभी आवश्यक नियमों और दिशानिर्देशों का पालन किया जाना चाहिए ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता उमेश चंद शर्मा ने कहा कि उनकी मांग है कि मध्य दिल्ली या जंतर-मंतर के आसपास 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नाम पर लोगों को बिना अनुमति एकत्र होने की अनुमति न दी जाए। दो-तीन वर्ष पहले सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे आयोजनों और सार्वजनिक जमावड़ों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे और उनकी याचिका उन्हीं निर्देशों के पालन की मांग करती है।

उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था और आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अभी वेकेशन चल रहा है तो एक ही बेंच बैठ रही है। हमने आज ही सुनवाई की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने हमारी मांग को खारिज कर दिया।

याचिकाकर्ता प्रीत सिरोही ने कहा कि अगर दिल्ली को शाहीन बाग बनाने की कोशिश की जाएगी तो हम भी सड़कों पर उतरेंगे। अगर देश विरोधी बयान दिए जाएंगे तो हम पुलिस का इंतजार नहीं करेंगे।