छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासियों के हक की लड़ाई लड़ रहे 'जय किसान संगठन' के प्रमुख नेता व आंदोलन के सूत्रधार अमित भटनागर ने 18 दिनों से जारी अपना आमरण अनशन आधिकारिक रूप से स्थगित कर दिया है। प्रशासन द्वारा छूटे हुए प्रभावित परिवारों के नाम जोड़ने के संबंध में जारी सकारात्मक आदेश, देश भर की 400 से अधिक प्रमुख हस्तियों की अपीलों और क्षेत्र की ग्रामीण व आदिवासी माताओं की चूल्हा-बंदी के नैतिक दबाव के बाद यह निर्णय लिया गया है।
अनशन स्थल और अस्पताल में अपनी माता जी तथा आंदोलनकारी आदिवासी माताओं के हाथों नारियल पानी पीकर उन्होंने अनशन स्थगित किया। हालांकि, अमित भटनागर ने स्पष्ट किया है कि अनशन समाप्त नहीं बल्कि केवल स्थगित हुआ है और अब इस लड़ाई को 'न्याय सत्याग्रह' के रूप में गांव-गांव तक ले जाया जाएगा।
प्रशासन ने दिखाया सकारात्मक रुख
अमित भटनागर ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि प्रशासन ने आंदोलनकारियों की मांगों पर एक सकारात्मक रुख दिखाया है। प्रशासन द्वारा एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत छतरपुर जिले के प्रभावित गांवों में प्रशासनिक टीमें (सर्वे दल) जाकर सर्वे करेंगी। इस प्रक्रिया के दौरान जो भी पात्र लोग छूट गए थे, उनके नाम परियोजना की सूची में जोड़े जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए 'जय किसान संगठन' का एक प्रतिनिधि भी सर्वे टीम के साथ मौजूद रहेगा।
400 हस्तियों ने की थी अनशन तोड़ने की अपील
अनशन स्थगित करने के पीछे राष्ट्रीय स्तर पर मिले समर्थन का भी बड़ा हाथ रहा। भटनागर ने बताया कि नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, सौम्या दत्ता, नीलम आल्वालिया, कैलाश मीणा, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार तथा प्रसिद्ध अभिनेत्री पूजा भट्ट समेत देश की 400 से अधिक प्रमुख फिल्मी हस्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसान नेताओं ने उनसे लगातार अनशन समाप्त करने का भावुक निवेदन किया था।
छतरपुर-पन्ना की माताओं की 'चूल्हा-बंदी' ने बनाया नैतिक दबाव
अमित भटनागर के अनुसार, अनशन स्थगित करने का सबसे मार्मिक और भावनात्मक पहलू स्थानीय ग्रामीण महिलाएं थीं। छतरपुर और पन्ना जिले की कई ग्रामीण व आदिवासी माताओं ने उनके समर्थन में स्वयं खाना छोड़ दिया था और अपने घरों में 'चूल्हा-बंदी' कर दी थी। इस नैतिक दबाव को देखते हुए ही उन्होंने अपने स्वास्थ्य की चिंता किए बिना अनशन को फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया।
'अब शुरू होगा न्याय सत्याग्रह'
प्रेस नोट के माध्यम से अमित भटनागर ने संकल्प लेते हुए कहा, "18 दिनों के आमरण अनशन ने अपने उद्देश्य की पहली सफलता प्राप्त कर ली है। लेकिन यह संघर्ष यहीं समाप्त नहीं हुआ है। आज से मैं 'न्याय सत्याग्रह' का संकल्प लेता हूँ। जब तक इस परियोजना के अंतिम पात्र व्यक्ति को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक मैं चैन से नहीं बैठूँगा।"
उन्होंने आगे कहा कि पर्यावरण, आदिवासियों के न्याय अधिकार और विस्थापन कानून के पालन को लेकर यह लड़ाई लंबी चलेगी। फिलहाल वे जिला अस्पताल में डॉक्टरों की देखरेख में हैं। स्वास्थ्य में सुधार होते ही वे अस्पताल से सीधे ज़मीनी स्तर पर (फील्ड में) उतरेंगे और गांव-गांव जाकर संघर्ष का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने अंत में कहा कि प्रशासन के हर सकारात्मक कदम में वे सहयोग करेंगे और हर वादे की निगरानी करेंगे, लेकिन जहाँ भी अन्याय दिखेगा, वहाँ लोकतांत्रिक विरोध और संघर्ष के लिए वे हमेशा तत्पर रहेंगे।




