ग्लासगो। भारत के 'गोल्डन बॉय' के नाम से मशहूर टोक्यो ओलंपिक में जैवलीन में स्वर्ण पदक जीतने वाले नीरज चोपड़ा कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हिस्सा लेने के लिए ग्लासगो पहुंच चुके हैं। नीरज ग्लासगो में गोल्ड कोस्ट में स्वर्ण पदक जीतने वाली सफलता को दोहराना चाहते हैं। उन्होंने कहा है कि अब हमारे एथलीट पहले से ज्यादा निर्भीक हो गए हैं और खुद को किसी विदेशी एथलीट से कम नहीं आंकते हैं।

मीडिया से बात करते हुए नीरज चोपड़ा ने कहा, "हमारे एथलीट पहले से ज्यादा निर्भीक हो गए हैं। पहले हमें विदेशी एथलीटों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में घबराहट होती थी। पहले हमारे एथलीट विदेशी एथलीटों को खुद से मजबूत आंकते थे। अब ऐसा नहीं है। अब हम कड़ी ट्रेनिंग करते हैं। हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है।"

तेज हवा और ठंड से जुड़े सवाल पर चोपड़ा ने कहा कि कंडीशन अनुकूल नहीं है, लेकिन ये सभी के लिए है। हमें घबराना नहीं है, बल्कि मानसिक रूप से मजबूत होना है। खराब से खराब स्थिति में हम क्या बेहतर कर सकते हैं, मैं इसके बारे में सोचता हूं।

नीरज ने कहा कि इवेंट के दौरान हमारा कोई विशेष लक्ष्य नहीं होता है। हमारा फोकस अपनी रणनीति और तकनीक को पूरी तरह फॉलो करने पर होता है। इवेंट के दौरान हम अपना 100 प्रतिशत देना चाहते हैं। बाद के लिए अफसोस न हो। हम ऐसा प्रदर्शन करना चाहते हैं। मैं कंडीशन के अनुसार अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करने की पूरी कोशिश करूंगा।

गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ और ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ पर कहा कि जब भी मैं भारत के लिए खेलने उतरता हूं, तो वो इवेंट मेरे लिए विशेष बन जाता है। मैं यहां अपना 100 प्रतिशत दूंगा। परिणाम तो उसी दिन पता चलेगा। हमारे अन्य एथलीट भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। रोहित काफी अच्छी थ्रो कर के आया है। हम साथ मिलकर बेहतर करने की कोशिश करेंगे।

अपनी फिटनेस के सवाल पर नीरज ने कहा, "फिलहाल मेरी फिटनेस पहले से बहुत बेहतर है। विश्व चैंपियनशिप के बाद दोहा में पहली बार उतरा था। दोहा के बाद अपनी फिटनेस और कमियों पर काम किया है और पहले से बेहतर महसूस कर रहा हूं।"

कॉमनवेल्थ गेम्स के तुरंत बाद एशियन गेम्स है। इस पर चोपड़ा ने कहा, "कई प्रतियोगिताएं लगातार होनी हैं। मेरी कोशिश खुद को फीट रखते हुए एशियन गेम्स सहित सभी प्रतियोगिताओं के लिए खुद को तैयार रखने और बेहतर प्रदर्शन करने पर है।"

90 मीटर दूर जैवलीन फेंकने के बाद क्या हर बार इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने का दबाव होता है? इस सवाल पर नीरज ने कहा कि दूरी का दबाव नहीं होता है, लेकिन एक एथलीट के तौर पर मेरा फोकस हमेशा अपने रिकॉर्ड को बेहतर करना, साथ ही दुनिया के श्रेष्ठ एथलीटों के बीच श्रेष्ठ करना होता है।

नीरज ने कहा कि दोहा से एक महीने पहले मैंने थ्रो करना शुरू किया था। मैं दोहा में गया था। यहां के लिए भी मुझे क्वालीफाई करना था। दोहा में मेरा थ्रो 85+ था, जो अच्छा था। वहां मुझे मेरी कमियां पता चलीं। अब यहां बेहतर करने की कोशिश करूंगा।

चोपड़ा ने कहा कि यहां का फील्ड अच्छा है। प्रतियोगिता काफी मुश्किल है। इसमें ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और डायमंड लीग में स्व्रण जीतने वाले एथलीट शामिल हैं। इसलिए आसान नहीं होने वाला है।

नीरज ने सरकार से प्रशिक्षण के दौरान मिल रहे सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से सरकार की तरफ से काफी सहयोग मिल रहा है। हम बाहर प्रशिक्षण कर पा रहे हैं। इससे एथलीटों काफी सहायता मिली है।