गांधीनगर‍टूबर । अहमदाबाद में गुजरात विद्यापीठ विद्यार्थियों को प्राकृतिक खेती की थ्योरेटिकल और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दे रहा है। इसका मकसद युवा पीढ़ी को रसायन मुक्त भोजन और पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूक करना है। इसके तहत यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को हर महीने 20 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें नेचुरल फार्मिंग के साथ ऑर्गेनिक सब्जियों के उत्पादन के महत्व के बारे में बताया जाता है।

गुजरात विद्यापीठ के छात्र बिनेश कोठीवार ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान बताया कि यहां हमें सीखने को मिला कि प्राकृतिक खेती से हमारी जिंदगी में बहुत सुधार आ सकता है, जैसे कि उपज, जमीन, भोजन और सेहत में काफी सुधार आ सकता है। इसलिए हमारी कोशिश है कि पूरे गुजरात में नेचुरल फार्मिंग को लागू किया जाए।

छात्र जानवी जादव ने बताया कि इस समय ज्यादातर केमिकल फर्टिलाइजर का इस्तेमाल हो रहा है। इससे कई बीमारियां फैल रही हैं, इसलिए अगर हम नेचुरल फार्मिंग को महत्व दें और उस पर काम करें तो अच्छा होगा। यहां हमने इसका महत्व सीखा और यह भी जाना कि इसे कैसे करना है।

गुजरात विद्यापीठ प्रशासन के मुताबिक ‘स्वास्थ्य, समृद्धि के साथ संपदा संरक्षण’ के मंत्र के अंतर्गत स्टूडेंट्स को रासायनिक खेती और उर्वरकों के नुकसान के बारे में जानकारी दी जा रही है। साथ ही, उन्हें गाय के गोबर से बीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत और प्राकृतिक खाद व कीटनाशक बनाने के तौर-तरीके सिखाए जा रहे हैं।

गुजरात विद्यापीठ के वाइस चांसलर डॉ. हर्षद पटेल ने कहा कि हमने बीआरएस पाठ्यक्रम में नेचुरल फार्मिंग का सब्जेक्ट शामिल किया है और स्टूडेंट्स को इसका अनुभव कैंपस में ही मिल सके, इसके लिए हमने यहां प्राकृतिक खेती के माध्यम से सब्जियां उगाने की व्यवस्था की है। साथ ही जीवामृत और घन जीवामृत कैसे बनाए जाते हैं, इसे खेती में कैसे उपयोग करते हैं, इसका उत्पादन कैसे किया जाता है, इसके लिए विद्यार्थियों को सिखाया जा रहा है और प्रत्यक्ष अनुभव भी दिए जा रहे हैं।

असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शैलेश चौधरी ने कहा कि प्राकृतिक खेती के अंतर्गत बीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत का इस्तेमाल पोषण के लिए किया जाता है। इसे यहां स्टूडेंट खुद बनाते हैं, जब पूरी फसल तैयार हो जाती है और कोई बीमारी या कीट का सवाल होता है तो हम अग्निअस्त्र और निमास्त्र का इस्तेमाल करते हैं और कीट को कंट्रोल करने का काम करते हैं।

जाहिर है कि प्राकृतिक खेती से उगाई जाने वाली सब्जियां जहां स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है, वहीं इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी बढ़ती है। ऐसे में अहमदाबाद का गुजरात विद्यापीठ युवाओं को प्राकृतिक खेती का पाठ पढ़ाकर न केवल एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, बल्कि उन्हें सस्टेनेबल फार्मिंग अपनाने के लिए प्रेरित भी कर रहा है।