गांधीनगरटूबर । मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में सरकार की ‘108 इमरजेंसी मेडिकल सर्विस’ नागरिकों के लिए लाइफलाइन बन चुकी है। 108 सेवा केवल एंबुलेंस नहीं है, बल्कि अस्पताल पहुंचने से पहले मिलने वाली ‘प्री-हॉस्पिटल केयर’ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए 29 अगस्त 2007 को इसकी शुरुआत की थी। अब यह सेवा 19 वर्ष पूरे कर 20वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। इतने वर्षों से इसके जरिए आपदाग्रस्त या आपातकालीन स्थिति में फंसे जरूरतमंदों, गंभीर रूप से बीमार या घायल व्यक्तियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए निशुल्क एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
लाभार्थी अशोक साधु ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि जिस प्रकार 108 मनकों की माला का आध्यात्मिक महत्व यह है कि 108 नाम जपने से परमपिता परमात्मा प्रकट होते हैं, वैसे ही 108 एंबुलेंस इतनी जल्दी आ जाती है कि मानो देवदूत मदद के लिए आ गए हों। मेरे भाई को जीवन देने में 108 सेवा ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई
लाभार्थी महबूब अली ने बताया कि मेरे बेटे की तबीयत खराब थी, हमने 108 एंबुलेंस के लिए कॉल किया। इसके बाद गाड़ी आई और बेहतर सुविधा प्रदान की। एंबुलेंस के जरिए हम समय पर अस्पताल पहुंच पाए।
जीवीआर ईएमआरआई के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर जसवंत प्रजापति ने कहा कि पूरे राज्य में करीब 800 रोड एंबुलेंस, 38 आईसीयू ऑन व्हील्स दो बोट एंबुलेंस और एक एयर एंबुलेंस चल रही हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि मरीजों को पूरी तरह से इंटीग्रेटेड पेशेंट ट्रांसपोर्ट मिले इसके लिए हमने 586 सरकारी हेल्थ सेंटर की एंबुलेंस को भी अपने साथ इंटीग्रेट किया है इसलिए अभी 108 सर्विस के तहत लगभग 1,500 एंबुलेंस 24 घंटे कार्यरत हैं।
बीते 19 वर्षों के दौरान 108 इमरजेंसी सेवा द्वारा अगस्त 2026 तक कुल 1 करोड़ 99 लाख से अधिक इमरजेंसी मामलों में त्वरित सेवा प्रदान की जा चुकी है, जिसमें मुख्य रूप से 1 करोड़ 96 लाख से अधिक मेडिकल इमरजेंसी मामले, 2 लाख 55 हजार से ज्यादा पुलिस संबंधी इमरजेंसी मामले और 8 हजार से अधिक फायर संबंधी घटनाओं में समय पर सहायता पहुंचाई गई है।
इस दौरान 19 लाख 66 हजार से ज्यादा लोगों की जान बचाई गई है। 108 सेवा के माध्यम से 19 वर्षों में जहां 62 लाख 97 हजार से ज्यादा गर्भावस्था और प्रसूति संबंधी मामलों में आपातकालीन सहायता पहुंचाई गई है, वहीं 24 लाख 18 हजार से अधिक सड़क दुर्घटना के मामले, 11 लाख 77 हजार से ज्यादा श्वास संबंधी गंभीर मामलों और 9 लाख 87 हजार से अधिक हार्ट अटैक संबंधी मामलों में मरीजों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाकर प्री-हॉस्पिटल केयर प्रदान की गई है।
एंबुलेंस वाहनों को 62 करोड़ किलोमीटर से अधिक चलाया गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में यह सेवा आज नई ऊंचाइयों को छू रही है और आज इसमें एयर एंबुलेंस और बोट एंबुलेंस सेवा जैसी आधुनिक सुविधाएं भी जुड़ चुकी हैं। 108 सेवा के माध्यम से पूरे राज्य में हर 21 सेकेंड में एक 108 एंबुलेंस इमरजेंसी मामले के उपचार के लिए रवाना होती है और सर्विस का औसत रिस्पॉन्स टाइम 13 मिनट 9 सेकेंड है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों से बेहतर है।
108 एंबुलेंस सेवा ड्राइवर राजेंद्र सिंह सोढा ने बताया कि हमारा समय पर पहुंचने का कारण यह होता है कि इसमें जीपीएस सिस्टम भी लगा होता है। इसके अलावा हम सब रास्तों के जानकार होते हैं। जहां से छोटा रास्ता होता है वहां से हम पहुंचने का प्रयास करते हैं और जितना हो सके उतनी स्पीड में और सावधानीपूर्वक हम मरीज के पास पहुंचने की कोशिश करते हैं।
108 एंबुलेंस सेवा मेडिकल टेक्नीशियन शैलेश ठाकोर ने कहा कि क्रिटिकल मामलों में जब भी एक्सीडेंट या कोई भी इमरजेंसी कॉल हमारे पास आती है तो हम सबसे पहले मरीज को बचाने की पूरी कोशिश करते हैं। इमरजेंसी के लिए सभी उपकरण जैसे एईडी मशीन, मॉनिटर, वेंटिलेटर और एयरवे मैनेज करने के लिए विभिन्न उपकरण दिए गए हैं और यदि रास्ते में कोई भी मरीज कोलैप्स हो जाता है तो हम उन्हें सही तरीके से सीपीआर देकर अस्पताल पहुंचाते हैं।
इस इमरजेंसी सर्विस के सफल संचालन के लिए अहमदाबाद के नरोडा-कठवाडा में स्टेट-ऑफ-द-आर्ट इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर बनाया गया है। कुल मिलाकर रोजाना औसतन 4,780 मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली गुजरात सरकार की यह निशुल्क सेवा आज राज्य के प्रत्येक अंतिम छोर के नागरिक के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है।













