भोपाल। मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में सक्रिय मानसूनी सिस्टम ने भारी तबाही मचाई है। श्योपुर, शिवपुरी, गुना और ग्वालियर समेत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, नदियां-नाले उफान पर हैं और प्रमुख बांधों के गेट खोलकर पानी की निकासी की जा रही है। बिगड़ते हालात और जनजीवन के प्रभावित होने के कारण प्रशासन ने श्योपुर, शिवपुरी, गुना, मुरैना, रायसेन, भिंड और ग्वालियर में शनिवार को नर्सरी से 12वीं तक के सभी सरकारी व निजी स्कूलों के साथ-साथ आंगनवाड़ी केंद्रों में भी छुट्टी घोषित कर दी है।
श्योपुर में बिगड़े हालात: मंदिर डूबा, कूनो और क्वारी नदी रौद्र रूप में
श्योपुर जिला बारिश से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। यहाँ लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर हैं: श्योपुर का प्रसिद्ध गुप्तेश्वर मंदिर पूरी तरह पानी में डूब गया है, जबकि कदवाल नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी किला गेट तक पहुँच चुका है। सेमल्दा का रास्ता बंद हो गया है। विजयपुर में क्वारी नदी के उफान पर आने से ऊपर के पुल पर पानी बह रहा है, जिससे विजयपुर-टेटरा मार्ग पूरी तरह बंद कर दिया गया है। विजयपुर की सब्जी मंडी में पानी भरने से कई दुकानें डूब गई हैं, जबकि रनसिंह कॉलोनी जलभराव की चपेट में है। सेसईपुरा के सेसई गांव स्थित रेशम कॉलोनी में रात के वक्त अचानक कूनो नदी का पानी घुसने से आदिवासी परिवार रातभर जागते रहे। सुबह कोई प्रशासनिक मदद न पहुँचने पर नाराज ग्रामीणों ने सड़क पर पेड़ और पत्थर रखकर जाम लगा दिया, जिसे बाद में पुलिस ने शांत करवाया।
लबालब भरे बांध, खोले गए मड़ीखेड़ा, बान सुजारा और आवदा डैम के गेट
आवदा डैम (श्योपुर): 45 फीट की भराव क्षमता पूरी होने के बाद डैम ओवरफ्लो हो गया है और इसके 4 गेट खोल दिए गए हैं।
मड़ीखेड़ा डैम (शिवपुरी): मड़ीखेड़ा डैम 90.49% तक भर गया है। जलस्तर 345.10 मीटर पहुँचने के बाद बांध के 4 गेट खोल दिए गए हैं, जिससे पावर हाउस मिलाकर 654.494 क्यूमेक्स पानी प्रति सेकंड छोड़ा जा रहा है।
बान सुजारा बांध (टीकमगढ़): धसान नदी पर बने इस बांध का जलस्तर 315 मीटर पहुँचने के बाद इसके 8 गेट (4 गेट 0.75 मीटर और 4 गेट 0.50 मीटर) खोले गए हैं। इससे धसान नदी में 668 घन मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पानी छोड़ा जा रहा है। लगभग एक सदी पुराना मिट्टी से बना यह ऐतिहासिक बांध ओवरफ्लो होकर वेस्ट वियर से करीब डेढ़ फीट ऊपर बह रहा है।
CM मोहन यादव की आपात समीक्षा: '2,783 से अधिक लोगों का रेस्क्यू किया गया'
बाढ़ और अतिवृष्टि की गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल स्थित राज्य आपदा प्रबंधन कक्ष पहुंचकर समीक्षा बैठक ली। CM ने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने तथा मैदानी अमले को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों (विशेषकर पूर्वी और उत्तरी मप्र) में अच्छी बारिश हुई है। एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें प्रभावित इलाकों में मुस्तैद हैं। बीते एक महीने में आपदा प्रबंधन टीमों ने राज्यभर से 2,783 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर उनका सफल रेस्क्यू किया है।
मौसम विभाग का 19 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम केंद्र (IMD) के अनुसार, वर्तमान मानसूनी सिस्टम की सक्रियता बनी रहेगी। विभाग ने प्रदेश के 19 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है: श्योपुर और शिवपुरी जिलों में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, सागर, गुना, अशोकनगर, विदिशा, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा और मंदसौर। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 7 और 8 सितंबर को भी कुछ इलाकों में मध्यम से तेज बारिश दर्ज हो सकती है, जिसके बाद ही मौसम धीरे-धीरे साफ होने की उम्मीद है।
बारिश का कुल आंकड़ा: पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 3% ज्यादा पानी
राज्य में बारिश के कुल आंकड़ों में बीते सप्ताह सुधार देखने को मिला है: मध्य प्रदेश में अब तक कुल 762.7 मिमी (30 इंच) बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य बारिश (32.1 इंच) से करीब 7% कम है। जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में हुई हालिया बारिश से आंकड़ा सुधरा है और अब पूर्वी हिस्से में सामान्य से 3% अधिक बारिश हो चुकी है। इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और भोपाल संभाग के कई जिलों समेत पश्चिमी हिस्से में औसत से 15% कम बारिश हुई है। प्रदेश के 24 जिलों में सामान्य से अधिक, जबकि 31 जिलों में सामान्य से 4% से 54% तक कम बारिश दर्ज की गई है।




