जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित प्रसिद्ध ग्वारीघाट पर शुक्रवार को नर्मदा नदी में सुरक्षा पेट्रोलिंग कर रहे होमगार्ड जवानों की एक मोटरबोट अचानक जलमग्न हो गई। बरगी बांध के कैचमेंट एरिया में लगातार हो रही भारी बारिश के बाद बांध के गेट खोले गए हैं, जिसके चलते नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा हुआ है और बहाव अत्यंत तीव्र है। तटीय क्षेत्रों और स्नान घाटों पर किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया था। इसी सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत होमगार्ड की आपदा प्रबंधन टीम मोटरबोट के जरिए ग्वारीघाट के आसपास सतत निगरानी और पेट्रोलिंग कर रही थी।
नर्मदा की बीच धार में बंद हुआ इंजन, तेजी से भरने लगा पानी
पेट्रोलिंग के दौरान जब मोटरबोट नर्मदा नदी के गहरे पानी और तेज बहाव के बीच पहुंची, तभी अचानक उसका इंजन बंद हो गया। तेज लहरों के बीच इंजन खराब होते ही नाव अनियंत्रित होकर डगमगाने लगी और उसमें तेजी से पानी भरने लगा। कुछ ही पलों में बोट एक तरफ झुक गई और डूबने लगी। बीच नदी में नाव डूबती देख उस पर सवार जवानों में हड़कंप और अफरा-तफरी मच गई। गनीमत यह रही कि ड्यूटी पर तैनात सभी जवानों ने सुरक्षा मानकों के तहत लाइफ जैकेट पहन रखी थी। नाव के पूरी तरह समाने से पहले ही कई जवानों ने नदी में छलांग लगा दी और तैरने लगे, जबकि कुछ जवानों को मौके पर मौजूद मुस्तैद स्थानीय नाविकों ने अपनी नावों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला। समय रहते मिले सहयोग से बड़ा हादसा टल गया और किसी भी जवान के हताहत होने की सूचना नहीं है।
4 सीटर नाव में सवार थे 8 जवान, क्षमता से अधिक भार बना हादसे की वजह
घटना के बाद बोट संचालन में घोर लापरवाही के तथ्य उजागर हुए हैं। जानकारी के अनुसार, जिस मोटरबोट का इस्तेमाल किया जा रहा था, उसकी निर्धारित वहन क्षमता मात्र 4 व्यक्तियों की थी। इसके विपरीत, जोखिम भरे तेज बहाव में उस पर 8 होमगार्ड जवान सवार किए गए थे। यानी बोट में क्षमता से करीब दोगुने लोग मौजूद थे। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का तो यहां तक कहना है कि नाव में 10 से 11 लोग सवार थे। ग्वारीघाट थाना पुलिस के अनुसार, हादसे के समय मोटरबोट को भानु नामक जवान चला रहा था। अत्यधिक भार होने के कारण इंजन पर दबाव बढ़ा और पानी में संतुलन बिगड़ने से यह गंभीर स्थिति निर्मित हो गई।
होमगार्ड कमांडेंट ने स्वीकारी चूक, विभागीय जांच के दिए आदेश
होमगार्ड कमांडेंट नीरज सिंह ठाकुर ने घटना की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि सभी जवान पूरी तरह सुरक्षित हैं और रेस्क्यू ड्यूटी पर तैनात थे। उन्होंने स्वीकार किया कि नाव में निर्धारित क्षमता से अधिक लोग सवार थे और प्राथमिक पड़ताल में बोट चालक की तकनीकी व व्यावहारिक चूक सामने आई है, जिसके चलते चालक से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। जांच में यह देखा जा रहा है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर ओवरलोडिंग की अनुमति किसने दी और विपरीत परिस्थितियों के लिए बैकअप सुरक्षा के क्या इंतजाम थे।




